
क्या है पूरा विवाद और क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन
अंकिता भंडारी हत्याकांड देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है, जिसमें न्याय की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर आ गई है। अंकिता के माता-पिता का आरोप है कि इस पूरे बहुचर्चित मामले में एक कथित वीआईपी को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह कड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि जिस मामले में अभी सीबीआई जांच के नतीजे आने बाकी हैं, उसी बीच राजनीतिक पदों पर नियुक्तियों की जल्दी क्यों दिखाई जा रही है।परिवार की मुख्य मांग है कि जब तक इस संवेदनशील मामले की परतें पूरी तरह से नहीं खुल जातीं और दूध का दूध तथा पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक आरोपी के रूप में उठाए जा रहे सवालों के घेरे में शामिल राजनीतिक चेहरों को संवैधानिक पदों पर सुरक्षित न किया जाए। परिवार का तर्क है कि ऐसे उच्च पदों पर नियुक्ति मिलने से कानूनी प्रक्रिया और न्याय की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, क्योंकि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को विशेष संरक्षण प्राप्त होता है। इसी मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ इंडिया गेट पर धरने पर बैठे थे।
रात के अंधेरे में हुई कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे माता-पिता के साथ पुलिस द्वारा की गई सख्ती की चौतरफा आलोचना हो रही है। रात के वक्त बुजुर्ग माता-पिता को इस तरह उठाए जाने की घटना ने शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी समेत कई अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे तानाशाही रवैया करार दिया है।सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे। जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया। इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो। पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी। कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता। #JusticeForAnkitaBhandari
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 15, 2026
राहुल गांधी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया कि इस सरकार की मूल पहचान यही बन चुकी है कि वह पीड़ितों की आवाज़ को दबा देती है और सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटा देती है। उन्होंने दृढ़ शब्दों में कहा कि न्याय की यह लड़ाई न तो कभी दबेगी और न ही कभी रुकेगी। कांग्रेस पार्टी हर परिस्थिति में अंकिता भंडारी के परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और तब तक खड़ी रहेगी जब तक पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी और अगला कदम
हिरासत से रिहा होने के बाद अंकिता भंडारी के परिवार ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है। परिवार का कहना है कि यदि उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे देशव्यापी आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होंगे। इस घटना के बाद से आम जनता के भीतर भी भारी रोष देखा जा रहा है और सोशल मीडिया पर #JusticeForAnkitaBhandari ट्रेंड कर रहा है।यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रतीक है कि जब तक देश की बेटियों को और उनके परिवारों को वास्तविक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह समाज और विपक्ष चैन से बैठने वाला नहीं है। सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए यह समय आत्मनिरीक्षण का है कि वे पीड़ितों की आवाज़ सुनने के बजाय उन्हें दबाने का मार्ग क्यों चुन रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और अधिक तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।