राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 10 अक्टूबर 2026 की तारीख एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद की गवाह बन गई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित ‘सेव डेमोक्रेसी’ प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों और छात्रों के साथ हुई हाथापाई और मारपीट की घटनाओं के बाद अब सोशल मीडिया पर आक्रोश का माहौल है। इस पूरी घटना के बीच न्यूज कैप्सूल की महिला पत्रकार मनीषा सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस प्रशासन और निष्पक्ष पत्रकारिता की सुरक्षा पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जंतर-मंतर और आसपास के प्रमुख इलाकों को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया था। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए थे ताकि भीड़ एकत्रित न हो सके। पुलिस कार्रवाई के तहत पूरे दिन में लगभग 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के शीर्ष नेता अभिजीत दीपके, प्रमुख कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई प्रमुख पत्रकार तथा छात्र कार्यकर्ता शामिल थे।
मनीषा सिंह ने अपने वीडियो संदेश में कहा, "मेरी एक वीडियो आज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है जिसमें आपने देखा होगा हिंदू रक्षा दल के गुंडे प्रदर्शन कर रहे बच्चों को बेरहमी से पीट रहे हैं। बाद में इन गुंडों ने मेरे कैमरा पर्सन पर भी अटैक किया, उनसे बहस की और वीडियो डिलीट करने को बोलने लगे। इस दौरान मेरा फोन छीनने की भी कोशिश की गई।"
उसी बयान में उन्होंने पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे कहा, "इस घटना की सबसे शर्मनाक बात तो ये थी कि मौके पर कई पुलिस वाले मौजूद थे लेकिन किसी ने भी उन गुंडों को रोकने की कोशिश नहीं की। उल्टा एक पुलिस वाले ने गुंडे के कान के पास जाकर कुछ कहा और मेरी ओर इशारा कर दिया, उसे सिग्नल दिया कि वो मेरा कैमरा बंद करवाए। जिसके बाद वो गुंडा मेरे कैमरा पर्सन की ओर आया और उनसे लड़ाई करने लगा। मामला बढ़ते देख हमें वहाँ से बचकर भागना पड़ा वरना ये गुंडे मुझ पर भी अटैक कर देते। ये हाल है आज देश की राजधानी का जहाँ आम आदमी तो छोड़िए पत्रकार तक सुरक्षित नहीं है।"
मिलैनियम पोस्ट और फ्रंटलाइन जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित तौर पर आरएसएस और केसरिया झंडे धारण किए हुए समर्थकों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर नारेबाजी की और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद कुछ अराजक तत्वों को ढील दी गई, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों को जबरन गाड़ियों में भरकर डिटेन किया गया। हालांकि, कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों का कहना है कि भीड़ में शामिल लोगों की संगठनात्मक संबद्धता की आधिकारिक और निष्पक्ष पुष्टि होना अभी बाकी है।
दूसरी ओर, शासन और पुलिस प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दिल्ली पुलिस का रुख है कि प्रदर्शन की पूर्व अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के कारण कानूनी कदम उठाए गए। सुरक्षा बलों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस का दावा है कि उन्होंने केवल शांति बनाए रखने और यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सख्त कदम उठाए।
घटना के निष्पक्ष वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के बाद अब चौतरफा मांग उठ रही है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसमें शामिल उपद्रवियों और अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण माहौल और कड़े सुरक्षा इंतजाम
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी ने दिल्ली में व्यापक प्रदर्शन का आह्वान किया था। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही धारा 163 लागू कर दी थी और किसी भी प्रकार के जमावड़े या प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जंतर-मंतर और आसपास के प्रमुख इलाकों को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया था। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए थे ताकि भीड़ एकत्रित न हो सके। पुलिस कार्रवाई के तहत पूरे दिन में लगभग 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के शीर्ष नेता अभिजीत दीपके, प्रमुख कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई प्रमुख पत्रकार तथा छात्र कार्यकर्ता शामिल थे।
महिला पत्रकार का सनसनीखेज बयान और वायरल वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान न्यूज कैप्सूल की रिपोर्टर मनीषा सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर तेजी से ट्रेंड करने लगा। वीडियो में मनीषा सिंह अपने ऊपर हुए हमले और ग्राउंड जीरो के हालात बयां करती दिख रही हैं।जिस पत्रकार के सामने पीटे गए प्रोटेस्टर उसे सुनें👇 https://t.co/r35EW7qfXK
— News Capsule (@newscapsule_) October 10, 2026
मनीषा सिंह ने अपने वीडियो संदेश में कहा, "मेरी एक वीडियो आज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है जिसमें आपने देखा होगा हिंदू रक्षा दल के गुंडे प्रदर्शन कर रहे बच्चों को बेरहमी से पीट रहे हैं। बाद में इन गुंडों ने मेरे कैमरा पर्सन पर भी अटैक किया, उनसे बहस की और वीडियो डिलीट करने को बोलने लगे। इस दौरान मेरा फोन छीनने की भी कोशिश की गई।"
उसी बयान में उन्होंने पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे कहा, "इस घटना की सबसे शर्मनाक बात तो ये थी कि मौके पर कई पुलिस वाले मौजूद थे लेकिन किसी ने भी उन गुंडों को रोकने की कोशिश नहीं की। उल्टा एक पुलिस वाले ने गुंडे के कान के पास जाकर कुछ कहा और मेरी ओर इशारा कर दिया, उसे सिग्नल दिया कि वो मेरा कैमरा बंद करवाए। जिसके बाद वो गुंडा मेरे कैमरा पर्सन की ओर आया और उनसे लड़ाई करने लगा। मामला बढ़ते देख हमें वहाँ से बचकर भागना पड़ा वरना ये गुंडे मुझ पर भी अटैक कर देते। ये हाल है आज देश की राजधानी का जहाँ आम आदमी तो छोड़िए पत्रकार तक सुरक्षित नहीं है।"
सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज और जमीनी हालात
सोशल मीडिया पर सामने आई फुटेज में सड़क किनारे बनी दीवार के पास भारी अफरा-तफरी, धक्का-मुक्की और हाथापाई के दृश्य साफ दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग प्रदर्शनकारियों को धक्का दे रहे हैं और नीचे गिरा रहे हैं, जबकि एक महिला पत्रकार हाथ में माइक लेकर पूरी घटना को रिकॉर्ड करने का प्रयास कर रही है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी इस पूरी घटनाक्रम के आसपास दिख रहे हैं।मिलैनियम पोस्ट और फ्रंटलाइन जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित तौर पर आरएसएस और केसरिया झंडे धारण किए हुए समर्थकों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर नारेबाजी की और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद कुछ अराजक तत्वों को ढील दी गई, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों को जबरन गाड़ियों में भरकर डिटेन किया गया। हालांकि, कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों का कहना है कि भीड़ में शामिल लोगों की संगठनात्मक संबद्धता की आधिकारिक और निष्पक्ष पुष्टि होना अभी बाकी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तीखे आरोप-प्रत्यारोप
घटना के सामने आते ही देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने अपने राजनीतिक गुंडों को खुली छूट दे रखी है, जो सड़क पर उतरकर छात्रों, नागरिकों और पत्रकारों पर हमला कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह स्वतंत्र मीडिया की आवाज को दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।दूसरी ओर, शासन और पुलिस प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दिल्ली पुलिस का रुख है कि प्रदर्शन की पूर्व अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के कारण कानूनी कदम उठाए गए। सुरक्षा बलों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस का दावा है कि उन्होंने केवल शांति बनाए रखने और यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सख्त कदम उठाए।
कानून-व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता पर उठते गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की ऑन-ग्राउंड सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जब राजधानी के मध्य में दिन-दिहाड़े किसी मीडिया कर्मी का फोन छीनने का प्रयास हो और उसके कैमरा पर्सन पर हमला किया जाए, तो यह न केवल कानून व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए भी खतरे की घंटी है।घटना के निष्पक्ष वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के बाद अब चौतरफा मांग उठ रही है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसमें शामिल उपद्रवियों और अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Tags
ख़बर
दिल्ली
पत्रकारिता
राजनीति
सीजेपी
CJP Protest
Delhi News
Democracy
Freedom of Press
Politics
Trending News