Green Diwali Campaign 2026: पर्यावरण मंत्रालय और WWF-India ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभियान, जानें कैसे लें भाग

दीपावली का पावन पर्व भारत का सबसे बड़ा और खुशियों भरा त्योहार माना जाता है। रोशनी, उमंग और मिठास से भरा यह पर्व हर भारतीय के दिल के बेहद करीब होता है, लेकिन बीते कुछ दशकों में दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण और धुंध का स्तर जिस तरह से बढ़ता है, वह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि पूरी प्रकृति के लिए चिंता का विषय बन चुका है। इसी गंभीर चुनौती का स्थायी समाधान निकालने और देशवासियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ईआईएसीपी (WWF-India EIACP) ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल की है। 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक चलने वाले एक भव्य और राष्ट्रव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान की आधिकारिक शुरुआत कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विद्यार्थियों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को एक साथ लाकर इस वर्ष की दिवाली को पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त, सुरक्षित और हरित बनाना है।

Green Diwali Campaign 2026: पर्यावरण मंत्रालय और WWF-India ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभियान, जानें कैसे लें भाग
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पारंपरिक पटाखों से तौबा और जनस्वास्थ्य की व्यापक सुरक्षा

इस राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कार्यक्रमों, नुक्कड़ नाटकों, कार्यशालाओं और निबंध प्रतियोगिताओं का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जा रहा है। सरकार और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया द्वारा देश भर के नागरिकों से यह भावुक और महत्वपूर्ण अपील की गई है कि वे इस दिवाली हानिकारक रसायनों वाले पटाखों और बारूद से तौबा करें। आतिशबाजी से निकलने वाला खतरनाक धुआं और विषैले कण हमारी हवा को सांस लेने योग्य नहीं छोड़ते। इसका सीधा असर हमारे घरों के बुजुर्गों, नन्हे-मुन्ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है। अभियान के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि त्योहार की असली भावना मिट्टी के दीयों की प्राकृतिक रोशनी, रंगोलियों के रंगों, स्वादिष्ठ पकवानों और आपसी प्रेम-सद्भाव में छिपी है, न कि विषैले धुएं और कान फोड़ू शोर में। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत चिन्हित एक सौ तीस प्रमुख गैर-अटैनमेंट शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए इस अभियान को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया का कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण: समझें अपनी जिम्मेदारी

इस राष्ट्रव्यापी अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल उपदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपनी जीवनशैली का आत्ममंथन करने का एक वैज्ञानिक अवसर प्रदान करता है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने नागरिकों के लिए एक विशेष कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण तैयार किया है। इस डिजिटल सर्वे के माध्यम से कोई भी व्यक्ति यह आसानी से समझ सकता है कि उसकी रोज़मर्रा की गतिविधियां, ऊर्जा खपत, यात्रा के साधन और उपभोग के तरीके हमारे नाजुक पर्यावरण पर किस तरह का दबाव डालते हैं। इस मूल्यांकन के आधार पर लोग अपने दैनिक जीवन में सुधार कर अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपना सकते हैं। नागरिक इस सर्वे में भाग लेने के लिए सीधे आधिकारिक वेबसाइट लिंक (
https://wwfindiawebgis.in/Carbon_Footprint/Carbon_Footprint.html) पर जा सकते हैं और अपनी जीवनशैली का कार्बन प्रभाव माप सकते हैं। यह कदम भारत सरकार के मिशन लाइफ (Mission LiFE - Lifestyle for Environment) के सिद्धांतों के पूरी तरह अनुकूल है।

जनभागीदारी और ऑनलाइन गूगल फॉर्म के जरिए प्रविष्टि दर्ज करने की प्रक्रिया

अभियान को धरातल पर सफल बनाने और इसे जन-आंदोलन का रूप देने के लिए देश भर के स्कूलों, कॉलेजों, ईआईएसीपी केंद्रों, सामुदायिक समूहों, नेहरू युवा केंद्रों और आम नागरिकों से गतिविधियों का ब्योरा साझा करने का अनुरोध किया गया है। यदि आप या आपका कोई संगठन अपने क्षेत्र में ग्रीन दिवाली से संबंधित कोई भी जागरूकता कार्यक्रम, पौधा रोपण या दीया बनाने की कार्यशाला आयोजित करता है, तो उसकी जानकारी आधिकारिक गूगल फॉर्म के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई जा सकती है। इसके लिए निर्धारित लिंक (
https://docs.google.com/forms/d/15hDbjbqZzeo68kNjAxeHQA_SMIQ7lUlPdvCIi-gvwdY/viewform) पर जाकर फॉर्म भरना होगा। जानकारी जमा करते समय संगठन या व्यक्ति का पूरा नाम और सटीक स्थान, आयोजित की गई गतिविधि का विस्तृत विवरण, कार्यक्रम की तारीख, और हरित संकल्प लेने वाले कुल प्रतिभागियों की संख्या लिखना अनिवार्य है। इसके अलावा पारदर्शिता के लिए जियो-टैग की गई तस्वीरें और एक संक्षिप्त रिपोर्ट भी अपलोड करनी होगी।

राष्ट्रीय मंच पर पहचान और उत्कृष्ट प्रविष्टियों का प्रदर्शन

इस राष्ट्रव्यापी मुहिम की सबसे आकर्षक बात यह है कि देश भर से प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाएगा। इनमें से जो भी प्रविष्टियां सबसे अधिक रचनात्मक, प्रभावशाली और समाज में बड़ा बदलाव लाने वाली होंगी, उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। चुनी गई उत्कृष्ट प्रविष्टियों और गतिविधियों को ईआईएसीपी की आधिकारिक वेबसाइटों तथा पर्यावरण मंत्रालय व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के प्रमुख सोशल मीडिया हैंडल पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे न केवल भाग लेने वाले युवाओं और संस्थाओं के काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि देश के कोने-कोने में मौजूद करोड़ों अन्य लोग भी इस हरित पहल से प्रेरित होंगे। यह प्रोत्साहन भारत के युवाओं में पर्यावरण के प्रति नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का संचार करेगा।

एक हरित, स्वच्छ और समृद्ध भारत का निर्माण

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि राष्ट्रव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान दो हजार छब्बीस केवल कुछ सप्ताह का सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच और भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत है। दीपावली का अर्थ है अंधकार पर प्रकाश की विजय, और आज के समय में पर्यावरण का प्रदूषण ही वह अंधकार है जिसे हमें अपनी जागरूक सोच के दीये से मिटाना है। जब देश का प्रत्येक नागरिक यह जिम्मेदारी उठाएगा कि वह हवा को जहरीला नहीं बनाएगा, तभी हमारी नदियां, हमारा वायुमंडल और हमारी मिट्टी सुरक्षित रह सकेगी। आइए, इस साल की दिवाली को एक नया रूप दें, बारूद की जगह पौधों और दीयों को प्राथमिकता दें, और एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो न केवल जगमगाता हो, बल्कि स्वस्थ रूप से सांस भी लेता हो।

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