बठिंडा की शराब फैक्ट्री में जोरदार धमाका: इथेनॉल प्लांट में लगी भीषण आग

पंजाब के बठिंडा जिले से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई है। बठिंडा-डबवाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गांव मसाना के पास संचालित बीसीएल (BCL) उद्योग समूह की शराब फैक्ट्री में शुक्रवार सुबह एक जोरदार धमाका हुआ, जिसके तुरंत बाद वहां भीषण आग लग गई। यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज आसपास के कई किलोमीटर दूर तक के गांवों में सुनी गई, जिससे पूरे इलाके के ग्रामीण और निवासियों में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

बठिंडा शराब फैक्ट्री में धमाका: इथेनॉल प्लांट में लगी भीषण आग

शुरुआती रिपोर्ट्स और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हुई यह आग फैक्ट्री परिसर के भीतर स्थित इथेनॉल प्लांट के मुख्य स्टोरेज टैंक में लगी। चूंकि इथेनॉल एक अत्यधिक ज्वलनशील रासायनिक पदार्थ है, इसलिए धमाके के साथ ही आग ने देखते ही देखते विकराल और रौद्र रूप धारण कर लिया।

आसमान में छाया काले धुएं का गुबार

फैक्ट्री के इथेनॉल टैंक में लगी आग इतनी भयंकर थी कि उसकी लपटें कई फीट ऊपर तक उठती दिखाई दीं। इसके साथ ही फैक्ट्री के अहाते से निकलने वाले गहरे काले धुएं के विशाल गुबार ने पूरे आसमान को अपने आगोश में ले लिया। आग का यह धुआं इतना सघन और भारी था कि यह कई किलोमीटर की परिधि में फैल गया। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो इलाके में अंधेरा छा गया हो। हवा के बहाव के साथ यह धुआं आसपास के ग्रामीण और रिहाइशी इलाकों की तरफ बढ़ गया, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।

स्थानीय निवासियों की सेहत पर बड़ा संकट, सांस लेने में आ रही दिक्कत

इस भयानक औद्योगिक दुर्घटना का सबसे गंभीर और तात्कालिक असर फैक्ट्री के आसपास बसे गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। पर्यावरण में फैले जहरीले और घने काले धुएं के कारण स्थानीय निवासियों ने सांस लेने में भारी तकलीफ और घुटन की शिकायत की है।

इस धुएं के कारण विशेष रूप से अस्थमा (दमा) और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, ग्रामीणों ने आंखों में तेज जलन, पानी आने और गले में लगातार खराश व दर्द की शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोग अपने घरों की खिड़की-दरवाजे बंद करने को मजबूर हो गए हैं।

राहत और बचाव कार्य: दमकल विभाग की टीमें मुस्तैद

धमाके और आग की सूचना मिलते ही फैक्ट्री प्रबंधन के बीच हड़कंप मच गया। आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों, तकनीकी स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके। इसके तुरंत बाद जिला दमकल विभाग को घटना की सूचना दी गई।

शुक्रवार सुबह सूचना मिलते ही बठिंडा और नजदीकी फायर स्टेशनों से दमकल विभाग की गाड़ियां और फायर फाइटर्स की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, इथेनॉल की आग होने के कारण इसे पानी से बुझाना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। आग की तीव्रता और खतरे को देखते हुए दमकल विभाग द्वारा विशेष फोम (Foam-based tenders) का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और सेना के केंद्रों से भी अतिरिक्त दमकल वाहनों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

प्रशासनिक टीम मौके पर, जांच के आदेश जारी

घटना की संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और राहत व बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से फैक्ट्री की ओर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया है ताकि आम लोगों की भीड़ वहां जमा न हो और राहत कार्य बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाना और इसे अन्य स्टोरेज टैंकों तक फैलने से रोकना है। हालांकि, आग लगने के स्पष्ट और वास्तविक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यह धमाका शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ, किसी तकनीकी खराबी के कारण या फिर प्रबंधन की लापरवाही से, इसकी जांच के लिए प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं।

ग्रामीणों ने की सुरक्षा और मुआवजे की मांग

दूसरी ओर, इस हादसे से आक्रोशित और डरे हुए ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ चिंता व्यक्त की है। प्रभावित गांवों के लोगों ने मांग की है कि रिहाइशी इलाकों के इतने करीब चल रहे इस तरह के खतरनाक प्लांट्स में सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच होनी चाहिए। साथ ही, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके की वायु गुणवत्ता (Air Quality) की तुरंत जांच की जाए और धुएं से बीमार हो रहे लोगों के इलाज के लिए तुरंत मेडिकल टीमों की तैनाती और मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाए जाएं। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

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