लोक परीक्षा संशोधन विधेयक संसद से पारित: राज्यसभा में हंगामे और वाकआउट के बीच पास हुआ कठोर कानून, PM मोदी ने दिया बड़ा संदेश

देश के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के लिए संसद से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक ख़बर आई है। संसद के दोनों सदनों से लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पारित होने के साथ ही देश की परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक नया मोड़ आ गया है। इस कानून के पारित होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का रुख साफ है कि अब पेपर माफिया, प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह और अनुचित साधनों को बढ़ावा देने वालों पर कानून का सबसे सख्त शिकंजा कसा जाएगा।

लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पास: राज्यसभा में वाकआउट के बीच कड़ा कानून पारित, PM मोदी की चेतावनी

राज्यसभा में विपक्षी दलों का जोरदार हंगामा और वाकआउट

संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान काफी गहमागहमी देखने को मिली। लोकसभा में चर्चा के बाद जब यह विधेयक राज्यसभा में विचार-विमर्श के लिए पहुंचा, तो विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर भारी हंगामा किया। विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया। जोरदार नारेबाजी और सदन के भीतर चले लंबे हंगामे के बीच जब सरकार की ओर से विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो विपक्षी दलों ने सदन से वाकआउट कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी और वाकआउट के बीच राज्यसभा ने इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी।

PM मोदी की दोटूक चेतावनी: बख्शे नहीं जाएंगे पेपर माफिया

विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को आश्वस्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से देश के भीतर एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था स्थापित करने के लिए काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि पेपर माफिया और प्रश्नपत्र लीक कराने वाले गिरोह देश के परिश्रमी युवाओं के सपनों पर सीधा हमला करते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश के छात्रों से जो वादा किया था, उसे पूरा करते हुए सरकार संसद में यह कड़ा कानून लेकर आई है।

राज्यों के सुझावों और सामूहिक प्रयासों पर विशेष जोर

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून का खाका तैयार करते समय राज्यों के सुझावों को बेहद गंभीरता से शामिल किया गया है। इसका कारण यह है कि बीते कुछ वर्षों में लगभग सभी राज्य और केंद्र सरकार पेपर लीक की गंभीर चुनौती का सामना कर रहे थे। इस साझा समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक सख्त और केंद्रीय कानून की आवश्यकता थी। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि संसद द्वारा पारित यह संशोधन विधेयक देश भर की परीक्षा प्रणालियों में सुदृढ़ता लाएगा।

केवल कानून नहीं, प्रशासनिक और तकनीकी सुधार भी होंगे लागू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार की जिम्मेदारी केवल एक कठोर कानून बनाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस, बेहद सुरक्षित और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार लगातार जारी रहेंगे। सरकार का लक्ष्य केवल पेपर लीक रोकना या नकल पर पाबंदी लगाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी पारदर्शी प्रणाली तैयार करना है जहाँ हर छात्र को उसकी लगन और कड़ी मेहनत के आधार पर ही सफलता का अवसर मिले।

विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान

संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों और युवा शक्ति से 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब देश ऐसी किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा जो युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेले। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस नए कानून के प्रभावी ढंग से लागू होने के बाद पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितनी तेजी से लगाम लगती है।

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