Sri Lanka Navy Chief Visit to India: भारत-श्रीलंका नौसेना संबंधों में नया अध्याय, रक्षा सहयोग को मिलेगी अभूतपूर्व मजबूती

हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से श्रीलंका नौसेना के कमांडर वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। 26 अगस्त से 29 अगस्त तक चलने वाला उनका यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रीलंका नौसेना की कमान संभालने के बाद वाइस एडमिरल फर्नांडो की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच गहरे और दीर्घकालिक रक्षा संबंधों की अहमियत को दर्शाती है।

Sri Lanka Navy Chief Visit to India: वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो की भारत यात्रा से समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती
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इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग के विभिन्न आयामों को और व्यापक बनाना है। दोनों देशों की नौसेनाएं न केवल भौगोलिक दृष्टि से एक-दूसरे के निकट हैं, बल्कि हिंद महासागर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भी एक-दूसरे की प्रमुख साझेदार रही हैं।

नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक पर मिला औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर

अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन नई दिल्ली पहुंचने पर श्रीलंका के नौसेना कमांडर का भव्य और औपचारिक स्वागत किया गया। साउथ ब्लॉक के ऐतिहासिक प्रांगण में वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो को भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) का दौरा किया, जहां उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद सैनिकों को भावभीनी श्रद्धां‍जलि दी।

श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात उन्होंने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नौसेना अध्यक्षों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गहन विचार-विमर्श हुआ।

द्विपक्षीय समुद्री सहयोग और संयुक्त अभियानों पर रणनीति

नौसेना प्रमुखों की इस बैठक में रणनीतिक और क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत की गई। मुख्य ध्यान संयुक्त नौसैनिक अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने, दोनों सेनाओं के बीच खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर केंद्रित रहा। इसके साथ ही, समुद्री सीमाओं की निगरानी, अवैध गतिविधियों और तस्करी रोकने तथा समुद्री सुरक्षा से संबंधित साझा चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच यह बहुआयामी समन्वय दोनों देशों के व्यापारिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों से संवाद और सहयोग के आयाम

अपनी यात्रा के क्रम में वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो भारतीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात कर रहे हैं। इस दौरान वे भारतीय रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद सत्र में हिस्सा ले रहे हैं।

इस संवाद का मुख्य लक्ष्य भारत के तेजी से विकसित होते रक्षा निर्माण क्षेत्र के साथ श्रीलंका की साझेदारी की संभावनाओं को तलाशना है। भारत में निर्मित आधुनिक नौसैनिक उपकरण, उन्नत गश्ती जहाजों और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग और समन्वय के नए रास्ते तलाशना इस बातचीत का प्रमुख हिस्सा है, जिससे दोनों देशों की सामरिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कोच्चि का दौरा और प्रशिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक आदान-प्रदान

नई दिल्ली में बैठकों के बाद वाइस एडमिरल फर्नांडो केरल के कोच्चि शहर के दौरे पर जाएंगे। कोच्चि भारतीय नौसेना की दक्षिणी नौसेना कमान का मुख्यालय है और इसे भारत का प्रमुख नौसैनिक प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है। वहां वे भारतीय नौसेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों का अवलोकन करेंगे और दक्षिणी नौसेना कमान के अधिकारियों से मिलेंगे।

इस कोच्चि दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच चल रहे प्रशिक्षण संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। भारतीय नौसेना लंबे समय से श्रीलंका के नौसैनिक अधिकारियों और कैडेटों को उच्च स्तरीय पेशेवर प्रशिक्षण प्रदान करती आई है। इस दौरे से प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) और तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान को और बढ़ावा मिलेगा।

हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति

श्रीलंका नौसेना लंबे समय से भारतीय नौसेना की एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण समुद्री सहयोगी रही है। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति और सागर (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन के तहत श्रीलंका की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो की इस ऐतिहासिक यात्रा से न केवल दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंध प्रगाढ़ होंगे, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, नौसैनिक अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्थिरता को नई दिशा प्राप्त होगी।

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