न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित 81वें महासभा सत्र (UNGA) के दौरान उस समय अभूतपूर्व तनाव और गहमागहमी देखने को मिली, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संबोधन के लिए मंच पर पहुंचे। उनके मंच संभालते ही हॉल में मौजूद दर्जनों देशों के प्रतिनिधियों और राजनयिकों ने विरोध स्वरूप एक साथ अपनी सीटें छोड़ दीं और बाहर निकल गए। देखते ही देखते महासभा हॉल की एक बड़ी हिस्सेदारी खाली हो गई।


पूरे सभागार में विरोध की हुंकार, तालियों की गूंज और सामूहिक वॉकआउट का एक मिला-जुला और तनावपूर्ण माहौल बन गया। इस स्थिति को संभालने और गरिमा बनाए रखने के लिए महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान को बार-बार अपने माइक से “हॉल में व्यवस्था बनाए रखें” की अपील करनी पड़ी।
यह कूटनीतिक विरोध गाजा में इजरायल द्वारा लगातार चलाई जा रही सैन्य कार्रवाई, भारी संख्या में आम नागरिकों के हताहत होने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए वारंट की पृष्ठभूमि में हुआ है। अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद से शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व में भारी तबाही मचाई है, जिसको लेकर वैश्विक स्तर पर इजरायल की आलोचना हो रही है।
इसके बाद उन्होंने अपना भाषण जारी रखा। नेतन्याहू ने ईरान पर इजरायल द्वारा किए गए हमलों का जोरदार बचाव किया और इसे अपने प्रधानमंत्री पद के सबसे आसान फैसलों में से एक करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर इजरायल यह कदम नहीं उठाता तो उसका खुद का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल अपनी सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ उन देशों के नागरिकों और दुनिया की भी रक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि आज विरोध में हॉल छोड़कर बाहर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के कई देशों के शीर्ष नेता निजी बातचीत में इजरायल का आभार व्यक्त करते हैं कि उसने ईरान की परमाणु क्षमताओं को निशाना बनाकर दुनिया को सुरक्षित किया है। अपने भाषण में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सबसे मजबूत और सच्चा साझेदार बताया।
हालांकि हॉल में अधिकांश सीटें खाली रहीं, लेकिन इजरायली प्रतिनिधिमंडल और उनके कुछ समर्थक देशों के प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू का खड़े होकर स्वागत किया और तालियां बजाईं। यह भाषण ऐसे समय में आया है जब नेतन्याहू अपने देश में घरेलू राजनीतिक दबाव और आगामी चुनावों का सामना कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस भाषण के जरिए वे देश के भीतर अपनी छवि को एक मजबूत नेता के रूप में पेश करना चाहते थे।
दूसरी ओर, नेतन्याहू के समर्थक इस पूरे घटनाक्रम को उनके अदम्य साहस और बेबाक रुख का प्रमाण बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में घटी यह घटना दर्शाती है कि गाजा और मध्य पूर्व के संकट ने पूरी दुनिया को कूटनीतिक रूप से दो धड़ों में बांट दिया है। इस पूरे वॉकआउट और भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और वैश्विक राजनीति में चर्चा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।
फिलिस्तीनी मिशन की अपील का दिखा असर, विरोध की यह थी मुख्य वजह
सभागार में हुआ यह व्यापक विरोध प्रदर्शन पहले से तय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। फिलिस्तीनी मिशन ने महासभा के कई सदस्य देशों से पहले ही यह विनम्र अपील की थी कि जब बेंजामिन नेतन्याहू संबोधन के लिए आएं तो सामूहिक रूप से हॉल का बहिष्कार किया जाए।यह कूटनीतिक विरोध गाजा में इजरायल द्वारा लगातार चलाई जा रही सैन्य कार्रवाई, भारी संख्या में आम नागरिकों के हताहत होने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए वारंट की पृष्ठभूमि में हुआ है। अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद से शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व में भारी तबाही मचाई है, जिसको लेकर वैश्विक स्तर पर इजरायल की आलोचना हो रही है।
वॉकआउट पर नेतन्याहू का तीखा पलटवार, जाने वालों को कहा 'नैतिक कायर'
हॉल से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों को बाहर निकलते देख प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंच से ही कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कोई और नैतिक कायर अभी तक हॉल छोड़कर नहीं गया है, तो कृपया वे भी अभी बाहर जा सकते हैं।इसके बाद उन्होंने अपना भाषण जारी रखा। नेतन्याहू ने ईरान पर इजरायल द्वारा किए गए हमलों का जोरदार बचाव किया और इसे अपने प्रधानमंत्री पद के सबसे आसान फैसलों में से एक करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर इजरायल यह कदम नहीं उठाता तो उसका खुद का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता।
गाजा में नरसंहार के आरोपों को बताया 'सदी का सबसे बड़ा झूठ'
अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने गाजा में नरसंहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के तमाम आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इन आरोपों को 'सदी का सबसे बड़ा झूठ' करार दिया।नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल अपनी सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ उन देशों के नागरिकों और दुनिया की भी रक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि आज विरोध में हॉल छोड़कर बाहर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के कई देशों के शीर्ष नेता निजी बातचीत में इजरायल का आभार व्यक्त करते हैं कि उसने ईरान की परमाणु क्षमताओं को निशाना बनाकर दुनिया को सुरक्षित किया है। अपने भाषण में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सबसे मजबूत और सच्चा साझेदार बताया।
7 अक्टूबर के हमलों का जिक्र और घरेलू राजनीति का समीकरण
नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों को याद करते हुए कहा कि आतंकी संगठन का मकसद इजरायल को पूरी तरह तोड़ना था, लेकिन इजरायली सेना और देश के लोगों ने एक शेर की तरह लड़ाई लड़ी है और दुश्मनों को करारा जवाब दिया है।हालांकि हॉल में अधिकांश सीटें खाली रहीं, लेकिन इजरायली प्रतिनिधिमंडल और उनके कुछ समर्थक देशों के प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू का खड़े होकर स्वागत किया और तालियां बजाईं। यह भाषण ऐसे समय में आया है जब नेतन्याहू अपने देश में घरेलू राजनीतिक दबाव और आगामी चुनावों का सामना कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस भाषण के जरिए वे देश के भीतर अपनी छवि को एक मजबूत नेता के रूप में पेश करना चाहते थे।
वैश्विक ध्रुवीकरण और इजरायल का बढ़ता कूटनीतिक अकेलापन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली नेताओं के भाषण के दौरान वॉकआउट की घटनाएं पहले भी देखी गई हैं, लेकिन इस बार का कूटनीतिक बहिष्कार अब तक का सबसे व्यापक और संगठित माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार खाली सीटों के सामने दिया गया यह भाषण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल के बढ़ते कूटनीतिक अकेलेपन (Diplomatic Isolation) को साफ उजागर करता है।दूसरी ओर, नेतन्याहू के समर्थक इस पूरे घटनाक्रम को उनके अदम्य साहस और बेबाक रुख का प्रमाण बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में घटी यह घटना दर्शाती है कि गाजा और मध्य पूर्व के संकट ने पूरी दुनिया को कूटनीतिक रूप से दो धड़ों में बांट दिया है। इस पूरे वॉकआउट और भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और वैश्विक राजनीति में चर्चा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।
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