दक्षिण-पश्चिम दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस का सबसे लोकप्रिय स्टूडेंट हब माना जाता है, रविवार दोपहर एक भयंकर त्रासदी का गवाह बना। यहां स्थित 'हॉस्टल डेज' नाम की पांच मंजिला पीजी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयानक हादसे में 7 मासूम छात्रों और मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद फरार चल रहे इमारत के मालिक और उसके परिवार पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए बड़ी कार्रवाई की है।



फरार मकान मालिक हरिराम गुप्ता और परिवार गिरफ्तार
सत्य निकेतन हादसे में दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मकान मालिक हरिराम गुप्ता (81), उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता (75) और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने हरिराम और उनकी पत्नी उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं, पीजी के मैनेजमेंट का काम देख रहे उनके बेटे महेश को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है ताकि हादसे की तह तक जांच की जा सके।हॉस्टल एग्रीमेंट की चौंकाने वाली शर्त आई सामने
इस दर्दनाक हादसे की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, मकान मालिकों और पीजी संचालकों की संवेदनहीनता उजागर हो रही है। जांच के दौरान सामने आया कि हॉस्टल के एग्रीमेंट में एक बेहद अजीब और विवादित शर्त जोड़ी गई थी। एग्रीमेंट के मुताबिक, इमारत में किसी भी तरह की दुर्घटना या अप्रिय घटना होने पर छात्रों को खुद ही जिम्मेदार ठहराया गया था। एग्रीमेंट का यह क्लॉज साफ दर्शाता है कि सुरक्षा मानकों और छात्रों की जान की कीमत को दरकिनार कर मकान मालिक अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ना चाहते थे।