
When claims and reality differ, let the facts do the talking. #FactCheck #Truth #DPUpdates https://t.co/oiiDC6Pqht
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 11, 2026
अभिजीत दीपके का तीखा पलटवार और गंभीर आरोप
जैसे ही दिल्ली पुलिस का यह फुटेज सामने आया, उस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। खुद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस के इन दावों की हवा निकाल दी और एक के बाद एक कई गंभीर आरोप मढ़ दिए। अभिजीत दीपके ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस ने अपने फुटेज में केवल वही हिस्सा दिखाया है जो उनके पक्ष में बैठता है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।I had requested to let me speak to my cousin who lives with my grandmother. Asked for my phone just for a couple of minutes so I could at least take out the number of my cousin. Why Delhi Police didn’t let me use my phone? I had also asked for a call with lawyer which was again denied. At 3:30 in the morning, Delhi Police asks me to call my father and inform him that tomorrow I’ll be going in jail for a long time. The same father who has just lost his mother. How much more trauma did you want to put my family through after we already lost my grandmother? What was the purpose of trying to call my parents at f-ing 3:30 in the morning? You wanted to torment them?
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 11, 2026
अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि पुलिस ने फुटेज के उस अहम हिस्से को क्यों डिलीट या एडिट करके छिपा दिया जिसमें वे लगातार अपने चचेरे भाई का नंबर निकालने के लिए अपना फोन मांग रहे थे? उनका कहना था कि उन्हें अपने परिवार के उस सदस्य से बात करनी थी जो उनकी दादी के साथ रहता था, लेकिन पुलिस ने उनका फोन उन्हें नहीं दिया। इसके अलावा, उन्होंने अपने वकीलों से बात करने की अनुमति मांगी थी, जिसे पुलिस अधिकारियों द्वारा सिरे से खारिज कर दिया गया। दीपके ने आरोप लगाया कि एक तरफ दिल्ली पुलिस मीडिया और सोशल मीडिया पर नैतिक उच्चता का ढोंग कर रही है और संवेदनशीलता का मुखौटा पहनकर फुटेज जारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उनका असली चेहरा कुछ और ही था।
Why did you delete the part where I was asking for my phone so I could retrieve my cousin’s number? And where I was asking to let me speak to my lawyers? The same Delhi Police which is now taking the moral high ground for informing me about my grandmother’s demise and offering me a ride home came to me at 3:30 in the morning with arrest papers, demanding that I sign them. Where did all that humanity go at 3:30 AM? Despite knowing that I had just lost my grandmother, they still insisted that I sign the arrest papers. I refused until I was allowed to speak to my lawyers.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 11, 2026
दीपके ने अपनी पोस्ट में यह भी खुलासा किया कि रात के करीब 3:30 बजे, जब पूरा शहर और उनका परिवार पहले से ही दादी के निधन के गम में डूबा हुआ था, दिल्ली पुलिस के अधिकारी अचानक गिरफ्तारी के कागजात लेकर उनके पास पहुँच गए। पुलिसकर्मियों ने उन पर भारी दबाव बनाया कि वे आधी रात को ही उन कागजों पर हस्ताक्षर करें। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि जब पुलिस को यह अच्छी तरह पता था कि उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उन्होंने अपनी दादी को खो दिया है, तो ऐसे में रात के साढ़े तीन बजे उनके पिता को फोन करके यह सूचना देने का क्या तुक बनता है कि उनका बेटा अब लंबे समय के लिए जेल जाने वाला है? उनके मुताबिक, यह किसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और टॉर्चर करने का एक सुनियोजित प्रयास था। अभिजीत ने दृढ़ता से कहा कि जब तक उन्हें उनके वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं दी गई, तब तक उन्होंने उन गिरफ्तारी के कागजों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था।
जंतर-मंतर हिरासत और कानूनी कार्रवाई का पुलिसिया पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की तरफ से अपनी कार्रवाई को पूरी तरह से वैध और कानून सम्मत ठहराया गया है। पुलिस रिकॉर्ड और प्रशासनिक दलीलों के अनुसार, अभिजीत दीपके और उनके साथियों पर यह कार्रवाई किसी व्यक्तिगत द्वेष के कारण नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई थी।प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पूर्व आचरण, अतीत में दी गई लिखित अंडरटेकिंग्स और कानूनी निर्देशों का उल्लंघन करने के इतिहास को इस कार्रवाई का आधार बनाया गया था। पिछली बार जब इन संगठनों या समूहों को विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, तब स्थिति काफी बिगड़ गई थी। प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई भीड़ ने भारी पथराव, आगजनी और हिंसा जैसी अवांछित घटनाओं को अंजाम दिया था, जिससे सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा था। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस बार किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं थी।
वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य और कानून-व्यवस्था की नाजुक स्थिति को सर्वोपरि रखते हुए, कॉरपोरेट जनता पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना प्रदर्शन की अनुमति विधिवत रूप से खारिज कर दी गई थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई थी। इस कानूनी प्रावधान के प्रभावी होने के कारण किसी भी तरह के अवैध जमावड़े, भीड़भाड़ या प्रोटेस्ट की अनुमति कानूनी रूप से नहीं दी जा सकती थी। इसी कड़े प्रशासनिक और कानूनी ढांचे के तहत, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कॉल के बाद नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में अभिजीत दीपके और उनके दो अन्य साथियों को 10 अक्टूबर को एहतियातन हिरासत में लिया गया था।