दिल्ली पुलिस की साइबर ईस्ट थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर गैंग का पर्दाफाश किया है जो साइबर ठगों को किराए पर बैंक खाते सप्लाई करने का बड़ा नेटवर्क चला रहा था. यह पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली के आई.पी. एक्सटेंशन में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित ने बताया कि OLX पर शॉपिंग करने के बहाने उसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई है और ठगों ने झांसा देकर उसके पैसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए हैं. मामले की गंभीरता और ऑनलाइन ठगी के इस खेल को देखते हुए ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया. इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एक स्पेशल पुलिस टीम बनाई गई जिसमें एसआई विकसित तोमर, हेड कांस्टेबल प्रवीण और हेड कांस्टेबल योगेश को शामिल किया गया ताकि इस फ्रॉड नेटवर्क की तह तक जाया जा सके.
तकनीकी जांच और आरोपियों की धरपकड़
विशेष टीम ने मामले को सुलझाने के लिए सबसे पहले टेक्निकल सर्विलांस, वित्तीय लेन-देन और मोबाइल नंबर्स की बारीकी से जांच शुरू की. बैंक रिकॉर्ड्स के तकनीकी विश्लेषण के दौरान पुलिस को दो संदेहास्पद बैंक खातों का पता चला, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी. इनमें से पहला खाता उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले 26 वर्षीय शिवम कुमार का था, जिसके यस बैंक खाते में ठगी के करीब 72 हजार रुपये क्रेडिट हुए थे. वहीं दूसरा खाता दिल्ली के तिलक नगर के रहने वाले 28 वर्षीय राजेंद्र शर्मा का था, जिसका इस्तेमाल ठगी के पैसों को आगे रूट यानी इधर-उधर घुमाने के लिए किया गया था और उसमें भी लगभग 50 हजार रुपये आए थे. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन दोनों खाताधारकों को ढूंढ निकाला और हिरासत में ले लिया.
पूछताछ में हुआ मुख्य सप्लायर का खुलासा
जब पुलिस टीम ने दोनों खाताधारकों से कड़ाई से पूछताछ की, तो इस पूरे रैकेट के पीछे छिपे मुख्य सप्लायर का नाम सामने आया. आरोपी शिवम कुमार ने खुलासा किया कि उसने यह बैंक खाता खुद के इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि मेरठ के रहने वाले 35 वर्षीय अंकित चौधरी के कहने पर खोला था. इस महत्वपूर्ण सुराग के मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीम ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक सुनियोजित छापेमारी की और मुख्य सप्लायर अंकित चौधरी को भी धर दबोचा. पूछताछ के दौरान अंकित चौधरी ने पुलिस के सामने कबूल किया कि वह महज कमीशन के लालच में यह काम कर रहा था और अब तक अपने साथियों के जरिए साइबर अपराधियों को कम से कम 5 ऐसे एक्टिव बैंक खाते बेच चुका है.
शातिराना मॉडस ऑपरेंडी का पर्दाफाश
पुलिस की विस्तृत जांच में इस गैंग के काम करने का बेहद ही शातिराना तरीका यानी मॉडस ऑपरेंडी सामने आया है. यह नेटवर्क मुख्य रूप से समाज के बेरोजगार, सीधे-साधे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना निशाना बनाता था. ये आरोपी उन लोगों को अच्छी नौकरी, वित्तीय लाभ या फिर हर महीने मोटा कमीशन देने का लालच देते थे और उनके नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवा लेते थे. जैसे ही बैंक में खाता खुल जाता था, ये आरोपी उस खाते की पासबुक, एटीएम कार्ड, नेट बैंकिंग का पासवर्ड और खाते से लिंक मोबाइल नंबर का सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे. इसके बाद ये लोग उस तैयार और चालू खाते का पूरा कंट्रोल देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे असली साइबर ठगों को सौंप देते थे.
म्यूल अकाउंट्स से पुलिस को भटकाने की साजिश
इन किरायों के खातों को साइबर अपराध की भाषा में 'म्यूल अकाउंट्स' कहा जाता है. साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल लोगों से लूटा हुआ पैसा सीधे मंगाने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके गायब करने के लिए करते थे. ऐसा करने से पुलिस और जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं, क्योंकि जब भी पुलिस जांच करती तो उसे उन गरीब और सीधे-साधे लोगों का नाम मिलता जिनके नाम पर खाता होता था, जबकि असली डिजिटल डकैत पर्दे के पीछे सुरक्षित बचे रहते थे. इस पूरे खेल में खाता खोलने वाले गरीब व्यक्ति को बहुत छोटा सा कमीशन मिलता था, जबकि बैंक खाते अरेंज करने वाला मुख्य सप्लायर अंकित चौधरी और उसके साथी साइबर अपराधियों से प्रति खाता मोटा मुनाफा कमाते थे.
पीड़ित को मिला रिफंड और पुलिस की सख्त चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने इस सफल ऑपरेशन के तहत तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर कानूनी प्रक्रिया के तहत रिमांड पर लिया है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों का पता लगाया जा सके. पुलिस ने आरोपियों के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है जिसका इस्तेमाल इस नेटवर्क को संचालित करने में हो रहा था. सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी के शिकार हुए पीड़ित व्यक्ति के खाते से उड़े पूरे 1 लाख 2 हजार 674 रुपये फ्रीज करवाकर सुरक्षित वापस दिला दिए हैं. ईस्ट दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार (IPS) ने इस कामयाबी पर टीम की सराहना की और साफ किया कि साइबर अपराध के इस पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दिल्ली पुलिस की नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी
इस बड़ी कार्रवाई के बाद ईस्ट दिल्ली पुलिस ने आम जनता को जागरूक करने के लिए एक विशेष एडवाइजरी भी जारी की है. डीसीपी राजीव कुमार ने नागरिकों को सावधान करते हुए कहा है कि कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने या बहकावे में आकर अपने नाम से बैंक खाता न खुलवाएं. लोग यह बात अच्छी तरह समझ लें कि अपना एटीएम कार्ड, पासबुक, चेक बुक या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी को भी इस्तेमाल के लिए देना भारी पड़ सकता है. अगर आप लालच में आकर अपना खाता किसी को किराए पर देते हैं और उसमें धोखाधड़ी का पैसा आता है, तो आप भी इस अपराध में बराबर के भागीदार माने जाएंगे और आपको भी जेल जाना पड़ सकता है. पुलिस ने अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदिग्ध नौकरी के ऑफर्स से सावधान रहें और किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं.