Air India Flight Turbulence: फुकेत-दिल्ली फ्लाइट हवा में 300 फीट नीचे गिरी, 15 लोग घायल

थाईलैंड के खूबसूरत पर्यटन स्थल फुकेत से भारत की राजधानी नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब विमान हवा में भीषण टर्बुलेंस यानी गंभीर वायुमंडलीय विक्षोभ की चपेट में आ गया। इस अचानक आए झटके के कारण विमान पल भर में लगभग 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया। अचानक हुई इस घटना से केबिन के अंदर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में विमान में सवार यात्रियों और केबिन क्रू सदस्यों समेत करीब 15 लोग घायल हो गए। हालांकि, पायलटों की सूझबूझ से विमान को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड करा लिया गया।
Air India Flight Turbulence: फुकेत-दिल्ली फ्लाइट हवा में 300 फीट नीचे गिरी, 15 लोग घायल
Image Source: Social Media

मिड-एयर टर्बुलेंस और अचानक 300 फीट नीचे गिरा विमान

एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या AI2379 फुकेत से उड़ान भरकर अपने तय समय के अनुसार नई दिल्ली की ओर बढ़ रही थी। यात्रा का शुरुआती हिस्सा सामान्य रहा, लेकिन जब विमान क्रूज़ एल्टीट्यूड पर था, तभी अचानक मौसम के बिगड़ने या एयर पॉकेट में आने के कारण विमान में तीव्र टर्बुलेंस महसूस किया गया। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, टर्बुलेंस इतना तेज था कि विमान ने महज कुछ ही सेकंड में करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी।

अचानक हुए इस जोरदार झटके के समय विमान में सवार कई यात्री सो रहे थे या अपनी सीटों पर आराम कर रहे थे। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी, वे अपनी सीटों से उछलकर ऊपर केबिन के पैनल और लगेज रैक्स से जा टकराए। इसके साथ ही, ट्रे टेबल पर रखी भोजन की सामग्री और बैग्स भी केबिन में इधर-उधर बिखर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवा में विमान करीब दो से तीन मिनट तक हिचकोले खाता रहा, जिससे यात्रियों में भारी दहशत फैल गई।

यात्रियों का खौफनाक अनुभव और केबिन का दृश्य

उड़ान में मौजूद यात्रियों ने दिल्ली उतरने के बाद अपनी आपबीती साझा की। यात्रियों ने बताया कि सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद अचानक झटका लगा और विमान एक तरफ झुक गया। करीब 15 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के सिर, हाथ और पीठ में चोटें आईं। विमान के अंदर बच्चों और महिलाओं की चीख-पुकार मच गई थी।

विमान में तैनात केबिन क्रू के सदस्य भी इस टर्बुलेंस से खुद को नहीं बचा सके। सेवा दे रहे क्रू मेंबर्स संतुलन बिगड़ने के कारण केबिन के फर्श पर गिर पड़े, जिससे उन्हें भी हल्की चोटें आईं। हालांकि, ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद क्रू मेंबर्स ने घबराए हुए यात्रियों को ढांढस बंधाया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग और तत्काल मेडिकल इमरजेंसी

गंभीर टर्बुलेंस के बाद भी पायलटों ने विमान पर नियंत्रण बनाए रखा और किसी भी बड़े हादसे को टाल दिया। विमान ने सुबह करीब 11 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित आपातकालीन लैंडिंग की। विमान के लैंड होते ही पहले से अलर्ट पर रखी गई मेडिकल टीमों और एम्बुलेंस को एयरक्राफ्ट के पास तैनात कर दिया गया।

एयरपोर्ट टर्मिनल के बाहर एम्बुलेंस तैनात थीं और घायल यात्रियों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की मदद से बाहर निकाला गया। प्राथमिक उपचार देने के बाद, मामूली चोटों वाले यात्रियों को हवाई अड्डे के मेडिकल फैसिलिटी सेंटर में जांच के लिए भेजा गया। वहीं, कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। राहत की बात यह है कि किसी भी यात्री को गंभीर या जानलेवा चोट नहीं आई है।

एयर इंडिया और उड्डयन नियामक (DGCA) का रुख

घटना के बाद एयर इंडिया के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि फुकेत-दिल्ली उड़ान AI2379 क्रूज़ के दौरान अल्पकालिक टर्बुलेंस का शिकार हुई थी, जिससे ऊंचाई में क्षणिक बदलाव आया था। एयरलाइन ने कहा कि सभी यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा रही है और प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश यात्रियों को छुट्टी दे दी गई है।

इस बीच, भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने घटना का कड़ा संज्ञान लिया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मौसम विज्ञान विभाग की ओर से टर्बुलेंस की अग्रिम चेतावनी दी गई थी या यह 'क्लियर एयर टर्बुलेंस' (CAT) का मामला था, जिसे रडार पर भी पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा विमान के स्ट्रक्चरल डैमेज का भी तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है।

हवाई यात्रा के दौरान टर्बुलेंस से बचने के सुरक्षा उपाय

विमान में टर्बुलेंस आना एक प्राकृतिक और सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन अचानक आने वाले तीव्र झटके खतरनाक हो सकते हैं। एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, टर्बुलेंस के समय सबसे बड़ा खतरा उन यात्रियों को होता है जो सीट बेल्ट नहीं पहनते। यात्रा के दौरान भले ही सीट बेल्ट का साइन बंद हो, यात्रियों को हमेशा सलाह दी जाती है कि वे अपनी सीट पर बैठते समय बेल्ट बांधकर ही रखें। इसके अलावा, केबिन में भारी सामान को सही तरीके से लॉक रखना और आपातकालीन स्थिति में पैनिक न होना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

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