सहारनपुर मस्जिद मामला: पत्रकार पूजा माथुर पर FIR, Meta और YouTube को नोटिस, जानें क्या है पूरा विवाद

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित कलेक्ट्रेट मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर ग्राउंड रिपोर्टिंग और मस्जिद के इमाम का साक्षात्कार सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बाद डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'रेड चिली लाइव' (Red Chilli Live) की संचालिका और स्वतंत्र पत्रकार पूजा माथुर के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेते हुए शहर कोतवाली में प्राथमिकियां दर्ज की हैं, जिसके बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रशासनिक कार्रवाई पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद: पत्रकार पूजा माथुर और Red Chilli Live पर FIR, जानें पूरा मामला
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सहारनपुर पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद अब संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटवाने और पत्रकार के डिजिटल अकाउंट्स पर बंदिश लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार, पुलिस ने यूट्यूब (YouTube) और मेटा (Meta) को औपचारिक नोटिस भेजकर 'रेड चिली लाइव' चैनल और पूजा माथुर के सोशल मीडिया अकाउंट्स को सस्पेंड करने का अनुरोध किया है। प्रशासनिक हलकों में इसे सोशल मीडिया पर भ्रामक व भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोकने की कार्रवाई बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर इसे मीडिया की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया जा रहा है।

पुलिस का पक्ष और दर्ज की गई FIR का आधार

सहारनपुर पुलिस प्रशासन के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र के उप निरीक्षक सत्येंद्र कुमार शर्मा और उप निरीक्षक राजकुमार गौतम की शिकायतों के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 7 सितंबर को 'पूजा माथुर' नाम के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल और 'रेड चिली लाइव' यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक वीडियो सामग्री में संवेदनशील दावे किए गए थे।

पुलिस के मुताबिक, वीडियो के शीर्षक और सामग्री में कलेक्ट्रेट स्थित लगभग 120 वर्ष पुरानी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने, वहां मौजूद धार्मिक ग्रंथों, किताबों और इमाम के सामान को मलबे के साथ उठाकर फेंकने से संबंधित टिप्पणियां की गई थीं। एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, प्रथम दृष्टया इन पोस्ट्स और वीडियो कंटेंट को आपत्तिजनक, धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला और शांति व्यवस्था के लिए खतरे के रूप में देखा गया, जिसके चलते शहर कोतवाली में सुसंगत धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।

पत्रकार पूजा माथुर का कड़ा रुख और प्रशासनिक दमन के आरोप

दूसरी तरफ, पत्रकार पूजा माथुर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए जारी बयानों में पुलिसिया कार्रवाई और मीडिया रिपोर्ट्स पर सख्त आपत्ति जताई है। पूजा माथुर का आरोप है कि उन्हें और उनके संस्थान 'रेड चिली लाइव' को निशाना बनाकर प्रेस की आजादी पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रशासनिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी और न ही अपने चैनल से संबंधित वीडियो को हटाएंगी।

पूजा माथुर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने जमीनी हकीकत को जनता के सामने रखा और मस्जिद के इमाम का पक्ष दुनिया को दिखाया। उनका कहना है कि निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बदले उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और लगातार मुख्यधारा के समाचार पत्रों में खबरें छपवाकर एक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला पत्रकार को बार-बार कानूनी मुकदमों में उलझाना प्रशासनिक हठधर्मिता और मीडिया दमन को दर्शाता है।

धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी के दावे पर गरमाई राजनीति

इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू मस्जिद ध्वस्तीकरण के दौरान धार्मिक सामग्री को नुकसान पहुंचाए जाने का दावा है। पूजा माथुर द्वारा साझा की गई रिपोर्ट में इमाम साहब का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि कार्रवाई के दौरान धार्मिक ग्रंथों और अन्य सामान को उचित सम्मान के साथ हटाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। हालांकि, पुलिस प्रशासन इन सभी दावों को भ्रामक और माहौल बिगाड़ने वाला करार दे रहा है।

पत्रकार का कहना है कि मौके पर जो स्थितियां बनीं और वहां के स्थानीय लोगों तथा इमाम ने जो आपत्तियां दर्ज कराईं, उन्हें दिखाना एक पत्रकार के रूप में उनका संवैधानिक कर्तव्य था। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि एक ही परिसर या आसपास के ढांचे के निष्पक्ष निस्तारण की प्रक्रिया में भेदभाव की भावना नहीं दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान के दायरे में रहकर जनता के सवाल पूछना अपराध नहीं है।

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और फ्रीडम ऑफ स्पीच का संकट

यह पूरा मामला अब महज एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डिजिटल मीडिया के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ गया है। जिस तरह से पुलिस द्वारा टेक कंपनियों (गूगल/यूट्यूब और मेटा) को पत्र लिखकर न्यूज चैनल के हैंडल सस्पेंड करने की संस्तुति की गई है, उससे स्वतंत्र पत्रकारों के सामने अपनी बात रखने का माध्यम छीन जाने का खतरा मंडराने लगा है।

सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई के बाद से ही मिला-जुला माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां प्रशासनिक कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग पूजा माथुर के समर्थन में उतर आया है। लोग इसे निष्पक्ष पत्रकारिता को खामोश करने की कोशिश बता रहे हैं।

आगे क्या होगा: कानूनी लड़ाई और मीडिया प्लेटफॉर्म्स का रुख

वर्तमान में पूजा माथुर ने अपने समर्थकों और दर्शकों से अपील की है कि वे 'रेड चिली लाइव' के कंटेंट को सेव और शेयर करें ताकि यदि टेक कंपनियां सरकारी नोटिस के दबाव में अकाउंट्स हटाती भी हैं, तो भी जनता तक हकीकत पहुंचती रहे। कानून के जानकारों का मानना है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां पुलिस के नोटिस पर कार्रवाई करती हैं, तो यह मामला अदालत के दरवाजे तक पहुंच सकता है, जहां सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और मौलिक अधिकारों के बीच की सीमा रेखा पर सुनवाई होगी।

सहारनपुर का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक और सामाजिक रंग ले सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यूट्यूब और मेटा पुलिस के इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं और पत्रकार पूजा माथुर इस कानूनी व प्रशासनिक चुनौती का सामना अदालत में किस रणनीति के साथ करती हैं।

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