नई दिल्ली/गुवाहाटी/पटना: NEET (UG) परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर चल रहा देशव्यापी छात्र आंदोलन एक बेहद अहम मोड़ पर पहुँच गया है। एक तरफ जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Das) ने 28 जुलाई तक दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस लेने की लिखित गारंटी का अल्टीमेटम दिया है, वहीं दूसरी तरफ असम और बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को तुरंत रिहा करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

CJP प्रवक्ता सौरव दास का अल्टीमेटम: "28 जुलाई तक वापस हों सभी FIR"
36 दिनों तक जंतर-मंतर पर चले ऐतिहासिक आंदोलन के बाद 25 जुलाई को सरकार द्वारा मांगें स्वीकार करने पर आंदोलन स्थगित किया गया था। हालांकि, विभिन्न राज्यों से छात्रों पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई और धरपकड़ की खबरों के बाद CJP ने सख्त रुख अपनाया।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ताओं के जरिए सरकार से 28 जुलाई 2026 तक सभी दर्ज मुकदमों को रद्द करने की मांग की। सौरव दास ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय-सीमा तक सभी राज्यों में एफआईआर वापस लेने का लिखित आदेश नहीं सौंपा जाता और गिरफ्तार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तो स्थगित आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर दोबारा शुरू किया जाएगा।
🚨BREAKING
— Saurav Das (@SauravDassss) July 27, 2026
Next up, Assam Government guarantees release of all arrested protesters, no FIRs or action in future, and withdrawal of all existing FIRs.@Cockroachisback pic.twitter.com/G8hzJCcBox
असम और बिहार सरकार का बड़ा फैसला: जारी हुए आधिकारिक आदेश
CJP के बढ़ते दबाव और 28 जुलाई के अल्टीमेटम के बीच एनडीए शासित दो प्रमुख राज्यों—असम और बिहार की सरकारों ने तुरंत एक्शन लेते हुए आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है:1. असम सरकार का आदेश:
असम सरकार के गृह एवं राजनीतिक विभाग (Home & Political Department) के अपर मुख्य सचिव अजय तिवारी द्वारा जारी पत्र (eCF 821775/1) के अनुसार:- 5 केस होंगे वापस: 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले दर्ज सभी 5 मुकदमों को तुरंत रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- 13 लोग होंगे रिहा: इन मामलों में गिरफ्तार किए गए सभी 13 व्यक्तियों/छात्रों को अविलंब रिहा करने का आदेश दिया गया है।
- भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और मामले को पूर्ण रूप से बंद माना जाएगा।
2. बिहार सरकार का आदेश:
बिहार सरकार के गृह विभाग (Home Department) के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह (IPS) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार:- दंडात्मक कार्रवाई नहीं: 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति पर बदले की भावना से कार्रवाई नहीं होगी।
- FIR और कारण बताओ नोटिस रद्द: राज्य में दर्ज सभी एफआईआर (FIRs), आपराधिक शिकायतें और नोटिस तुरंत वापस लिए जाएंगे।
- तत्काल रिहाई: हिरासत या जेल में बंद सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल प्रभाव से रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं।
अन्य राज्यों पर बढ़ा नैतिक दबाव
असम और बिहार सरकारों द्वारा उठाए गए इस पारदर्शी और सकारात्मक कदम से देश के अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली और पश्चिम बंगाल) के प्रशासन पर भी मुकदमों को तुरंत रद्द करने का भारी नैतिक दबाव बन गया है।CJP नेताओं और छात्र संगठनों ने इन दोनों राज्यों के फैसलों का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे देश में हर एक छात्र पर दर्ज केस खत्म नहीं होता, तब तक उनकी नज़रें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी रहेंगी।
क्या शांत होगा छात्र आंदोलन?
असम और बिहार सरकार द्वारा मुकदमों को वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई का फैसला छात्र आंदोलन की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। अब 28 जुलाई की अंतिम समय-सीमा को देखते हुए केंद्र सरकार और अन्य राज्य प्रशासनों के अगले कदम पर पूरे देश के युवाओं और अभिभावकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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