4 साल से छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप बैन: सरकार का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बेहद अहम और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चार साल से कम आयु के बच्चों के लिए सर्दी, जुकाम और खांसी के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास निश्चित खुराक संयोजन (Fixed Dose Combination - FDC) वाली दवाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड युक्त सभी FDC दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण चार साल से छोटे बच्चों के उपयोग के लिए तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।

4 साल से छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप बैन: सरकार का बड़ा फैसला

बच्चों की दवा सुरक्षा से जुड़ा यह फैसला देश भर के माता-पिता, बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य शिशुओं और छोटे बच्चों में इन दवाओं के कारण होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों और स्वास्थ्य जोखिमों को रोकना है।

अधिसूचना का विस्तार और पुराना संदर्भ

यह पहला मौका नहीं है जब सरकार ने इन दवाओं पर कड़े नियम लागू किए हैं। इससे पहले भी 15 अप्रैल 2025 को जारी अधिसूचना [S.O. 1717(E)] के माध्यम से सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड के कुछ विशिष्ट संयोजनों पर आयु-संबंधी चेतावनियां अनिवार्य की थीं। हालांकि, उस समय यह नियम कुछ चुनिंदा दवाओं और फॉर्मूलेशन तक ही सीमित था।

हालिया अधिसूचना के माध्यम से सरकार ने अपने इस रुख को और सख्त कर दिया है। अब यह प्रतिबंध किसी एक या दो चुनिंदा ब्रांड पर नहीं, बल्कि इन दोनों सक्रिय अवयवों (Active Ingredients) से मिलकर बनने वाले सभी प्रकार के FDC फॉर्मूलेशन पर समान रूप से लागू होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाजार में उपलब्ध कोई भी कफ सिरप या ड्रॉप्स, जिसमें यह संयोजन मौजूद है, उसे चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए न तो बेचा जा सकता है और न ही डॉक्टर द्वारा लिखकर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञ समिति और DTAB की सिफारिशें

सरकार द्वारा उठाया गया यह जनहितकारी कदम विशेषज्ञों की गहन जांच और वैज्ञानिक परामर्श के बाद आधारित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति और औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (Drug Technical Advisory Board - DTAB) ने इस मुद्दे पर लंबे समय तक अध्ययन किया। समिति की समीक्षा के अनुसार, चार साल से कम उम्र के बच्चों में क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट (जो एक एंटीहिस्टामाइन है) और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड (जो एक नेज़ल डिकॉन्गेस्टेंट है) का संयोजन कई प्रकार के शारीरिक जोखिम पैदा कर सकता है।

शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों का शरीर इन रासायनिक घटकों को सहन करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता, जिससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ, हृदय गति में असंतुलन, अत्यधिक सुस्ती या अन्य गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बच्चों में सामान्य सर्दी और खांसी के इलाज के लिए इन संयोजनों के स्थान पर अन्य बेहद सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इसलिए, बच्चों की जान को खतरे में डालने वाले ऐसे FDC संयोजनों को बाजार से तुरंत प्रभाव से नियंत्रित करना आवश्यक हो गया था।

दवा निर्माताओं और कंपनियों के लिए सख्त निर्देश

अधिसूचना लागू होने के बाद अब देश भर के सभी दवा निर्माताओं, फार्मा कंपनियों और वितरण एजेंसियों को कड़े निर्देशों का पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन दोनों अवयवों वाली FDC दवाओं के लेबल, पैकेज इंसर्ट, कार्टन और किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री पर एक अनिवार्य चेतावनी प्रमुखता से छापना अनिवार्य होगा।

दवा की शीशी और बाहरी बॉक्स पर स्पष्ट रूप से यह लिखा होना चाहिए कि "इस निश्चित खुराक संयोजन (FDC) का उपयोग चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में नहीं किया जाना चाहिए।" यदि कोई दवा कंपनी या फार्मास्यूटिकल ब्रांड इस निर्देश की अनदेखी करता है या अपने उत्पादों पर यह चेतावनी छापने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, मेडिकल स्टोर्स और फार्मासिस्टों को भी यह हिदायत दी गई है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह और बच्चे की उम्र की पुष्टि किए ऐसी दवाएं न बेचें।

कानूनी प्रावधान और आधिकारिक राजपत्र

जनस्वास्थ्य के हित में उठाया गया यह कदम औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) की धारा 26A के तहत लागू किया गया है। यह धारा केंद्र सरकार को जनहित में किसी भी ऐसी दवा के निर्माण, बिक्री या वितरण को विनियमित, प्रतिबंधित या पूरी तरह बैन करने का कानूनी अधिकार देती है, जो इंसानों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाई जाती है।

यह नई व्यवस्था आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में प्रकाशन की तिथि से ही प्रभावी मानी जाएगी। आम जनता, डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की जानकारी और पारदर्शिता के लिए सरकार ने आधिकारिक राजपत्र का लिंक (egazette.gov.in) भी साझा किया है, जहां से इस अधिसूचना की विस्तृत कानूनी प्रति डाउनलोड कर देखी जा सकती है।
 
लिंक: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275640.pdf

माता-पिता और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

सरकार के इस फैसले से आम जनता, विशेषकर छोटे बच्चों के माता-पिता को एक बड़ा संदेश मिलता है। कई बार देखा जाता है कि बच्चे को मामूली जुकाम या नाक बंद होने पर अभिभावक बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से ओवर-द-काउंटर (OTC) कफ सिरप खरीदकर पिला देते हैं। यह अभ्यास बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

अब जब सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया है कि 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन और फिनाइलेफ्राइन का कॉम्बिनेशन असुरक्षित है, तो माता-पिता को खुद से कोई भी सिरप देने से बचना चाहिए। यदि बच्चे को सर्दी, जुकाम या खांसी की समस्या है, तो केवल किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से ही संपर्क करें और उनके द्वारा सुझाई गई सुरक्षित दवाओं का ही उपयोग करें।

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