लॉरेंस बिश्नोई गैंग का गुर्गा गिरफ्तार: 2 करोड़ की रंगदारी मामले में सफलता

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजधानी में सक्रिय संगठित अपराध और रंगदारी वसूलने वाले गिरोहों के खिलाफ एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस की वेस्टर्न रेंज-2 टीम ने लॉरेंस बिश्नोई और रणदीप मलिक गैंग से जुड़े 40 वर्षीय अमरजीत उर्फ अमर को दिल्ली के रानी बाग इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मौर्या एनक्लेव थाने में दर्ज 2 करोड़ रुपये की रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने के मामले में काफी समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(b) के तहत की गई है।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का गुर्गा गिरफ्तार: 2 करोड़ की रंगदारी मामले में सफलता

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी अमरजीत पर कई दिनों से तकनीकी और मैदानी निगरानी रखी जा रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कई हथकंडे अपनाए, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी और सटीक रणनीति के चलते वह पकड़ा गया। अदालत में उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी थी और उसके खिलाफ धारा 84 BNSS के तहत भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी।

व्हाट्सएप कॉल्स से दी थी 2 करोड़ की धमकी

यह पूरा मामला 12 अप्रैल 2026 को सामने आया था, जब पीड़ित व्यापारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे व्हाट्सएप कॉल्स और संदेशों के माध्यम से 2 करोड़ रुपये की फिरौती देने की मांग की जा रही है। फोन करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई और रणदीप मलिक गैंग से जुड़ा हुआ बताया था।

आरोपी ने पैसे न देने की स्थिति में शिकायतकर्ता और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की सीधी धमकी दी थी। पीड़ित ने पुलिस को व्हाट्सएप चैट्स और मैसेज के सबूत भी सौंपे थे। इसके बाद मौर्या एनक्लेव थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

छापेमारी और रानी बाग में नाटकीय गिरफ्तारी

राजधानी में बढ़ रहे रंगदारी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने रानी बाग, मुल्तानी मोहल्ला और त्रि नगर इलाकों में तलाशी अभियान तेज किया।

20 अगस्त 2026 को शाम लगभग 5:00 बजे पुलिस को सूचना मिली कि अमरजीत मुल्तानी मोहल्ला के पास छिपा हुआ है। जब पुलिस टीम ने मकान नंबर 1338 के पास जाल बिछाया, तो आरोपी ने पुलिस को देखकर भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने तुरंत उसका पीछा किया और थोड़ी ही दूरी पर उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे द्वारका स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर ले जाया गया।

क्रिप्टोकरेंसी में मांगी थी रंगदारी

पूछताछ में पता चला कि अमरजीत उर्फ अमर त्रि नगर, रामपुर (उत्तर-पश्चिम दिल्ली) का रहने वाला है और 10वीं तक पढ़ा लिखा है। पहले वह करोल बाग के मोबाइल मार्केट में काम करता था और अप्रैल 2026 तक अवैध शराब बेचने के धंधे में भी शामिल था।

रंगदारी के इस नेटवर्क में अमरजीत ने अपने एक सह-आरोपी की मदद से एक बड़े कारोबारी का नंबर हासिल किया था। उसे अपराध को अंजाम देने के लिए एक मोबाइल फोन भी दिया गया था। अमरजीत और उसके साथी आपस में पहचान छिपाने के लिए स्नैपचैट ऐप का इस्तेमाल करते थे। आरोपी ने पीड़ित से रंगदारी की राशि क्रिप्टोकरेंसी में मांगी थी और पैसे ट्रांसफर करने के लिए एक पेमेंट लिंक भी साझा किया था।

संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस का कड़ा संदेश

दिल्ली पुलिस ने इस सफल ऑपरेशन के बाद यह साफ कर दिया है कि राजधानी में किसी भी गैंग, रंगदारी नेटवर्क या संगठित अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की क्राइम ब्रांच लगातार ऐसे असामाजिक तत्वों और गिरोहों पर पैनी नजर बनाए हुए है तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

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