आयकर विभाग ने संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण के खिलाफ शुरू किया बड़ा देशव्यापी अभियान

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतर्गत आयकर विभाग ने विदेश भेजे जाने वाले संदिग्ध धन (Outward Foreign Remittances) के मामले में एक बहुत बड़ा देशव्यापी सत्यापन अभियान शुरू किया है। विभाग को खुफिया जानकारी और डेटा विश्लेषण से यह पता चला था कि पिछले तीन सालों में कई संदिग्ध संस्थाओं ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर भेजी है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आयकर विभाग ने फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के एक समूह पर छापेमारी की, जो फर्जी दान और प्रविष्टियां प्रदान करने में शामिल थे।

आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई: संदिग्ध विदेशी ट्रांजैक्शन पर देशव्यापी सत्यापन शुरू

शेल कंपनियों और फर्जी खातों के जरिए विदेश भेजा जा रहा था पैसा

आयकर विभाग द्वारा किए गए प्राथमिक सत्यापन में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पाया गया कि विदेश में भारी-भरकम राशि भेजने वाली कंपनियां या तो आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल ही नहीं करती थीं, या फिर अपने रिटर्न में बहुत ही कम टर्नओवर दिखाती थीं। इन कंपनियों के कारोबार का विदेश भेजी जा रही बड़ी धनराशि से कोई तार्किक मेल नहीं था। इसके अलावा, माल ढुलाई (Freight Payment), सॉफ्टवेयर आयात या परामर्श सेवाओं जैसे जिन उद्देश्यों का उल्लेख पैसा भेजने के लिए किया गया था, वे पूरी तरह संदिग्ध पाए गए। विभाग की ज़मीनी जांच में यह भी सामने आया कि कई संस्थाएं अपने दिए गए आधिकारिक पते पर मौजूद ही नहीं थीं।

394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों पर कसा शिकंजा

आयकर विभाग ने 18 अगस्त 2026 को एक राष्ट्रव्यापी विस्तृत सत्यापन अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शेल कंपनियों, उनके पीछे मौजूद मुख्य व्यक्तियों और फॉर्म 15सीबी (Form 15CB) जारी करने वाले पेशेवरों की जांच करना है। देश की ज़मीनी सीमाओं से सटे सीमावर्ती ज़िलों में स्थित उन संस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने विदेश में मोटी रकम भेजी है। इस पूरे अभियान के दौरान लगभग 394 संस्थाओं (जिसमें सीमावर्ती राज्यों में स्थित 117 संस्थाएं शामिल हैं) और 36 पेशेवरों को जांच के दायरे में लिया गया है।

फॉर्म 15सीबी जारी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटों की भूमिका जांच के दायरे में

डेटा के विस्तृत विश्लेषण से यह भी सामने आया कि फॉर्म 15सीबी (Form 15CB) प्रमाणपत्रों का एक बड़ा हिस्सा पेशेवरों के एक छोटे से समूह द्वारा जारी किया गया था। आयकर नियमों के तहत किसी भी विदेशी धन प्रेषण को प्रमाणित करने से पहले लेखाकार (Accountant) के लिए खातों की पुस्तकों और संबंधित दस्तावेजों की जांच करना अनिवार्य होता है। हालांकि, जांच में पाया गया कि कई सीए और पेशेवरों ने उचित जांच-पड़ताल (Due Diligence) किए बिना ही यह प्रमाणपत्र जारी कर दिए थे।

सीबीडीटी ने पेशेवरों को दी सख्त चेतावनी, जांच जारी

आयकर विभाग और सीबीडीटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि फॉर्म 15सीबी या फॉर्म 146 जारी करने वाले सीए और पेशेवरों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे पूरी सावधानी और पेशेवर ईमानदारी बरतें। किसी भी विदेशी ट्रांजैक्शन को प्रमाणित करने से पहले उसके तथ्यों की गहराई से जांच होनी चाहिए, क्योंकि प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए यह प्रमाणीकरण बेहद अहम भूमिका निभाता है। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में आगे की विस्तृत कानूनी जांच और कार्रवाई अभी जारी है।

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