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| Image Source: Dipika Pandey Singh |
24 दिनों से जारी था आंदोलन, सदर अस्पताल से हुआ अनशन का समापन
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रियाओं में सुधार की मांग को लेकर 'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच' के बैनर तले पिछले 24 दिनों से विभिन्न माध्यमों से विरोध व्यक्त किया जा रहा था। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो अनशन के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।#WATCH | Ranchi, Jharkhand: Student leader Devendra Nath Mahato breaks his hunger strike in the presence of Jharkhand Ministers Dipika Pandey Singh and Irfan Ansari at the Sadar Hospital after the CM's announcement to cancel the JSSC-CGL exam and all exams conducted by TDPL. pic.twitter.com/AUEURpxMRr
— ANI (@ANI) August 17, 2026
अस्पताल में चिकित्सकों की देखरेख के बीच भी अनशन जारी रहा। डॉक्टरों द्वारा लगातार उनके स्वास्थ्य सूचकांकों की निगरानी की जा रही थी। सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा आधिकारिक आश्वासन दिए जाने और मांग-पत्र पर सहमति बनने के बाद अनशन समाप्त कराने की प्रक्रिया पूरी की गई।
सदर अस्पताल, रांची में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के साथ अनशन पर बैठे सभी आंदोलनरत छात्रों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
— Dipika Pandey Singh (@DipikaPS) August 17, 2026
हमारी सरकार छात्रों के साथ है। उनकी जायज़ मांगों को सुनना, समझना और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना हमारी प्राथमिकता है।@HemantSorenJMM… pic.twitter.com/ovZl6aHxpS
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और प्रक्रियात्मक निर्णय
परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जांच एजेंसियां भी अपनी कार्रवाई कर रही हैं। राज्य सीआईडी (CID) की टीम द्वारा JSSC कार्यालय में जांच पड़ताल की गई है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है। इस मामले में पुलिस एवं जांच एजेंसियों ने कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं।इसके साथ ही, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी व प्रशासनिक त्रुटि को रोकने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के हितों की रक्षा करना राज्य प्रशासन की प्राथमिकता है।
राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक रुख
इस पूरे मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज देखने को मिलीं। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान निकालने के लिए तैयार है, जबकि विपक्षी दलों ने युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार के रुख पर सवाल उठाए थे।दूसरी ओर, अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण की प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखेंगे। प्रशासन का ध्यान अब राज्य में आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं को सुचारू और विवाद-रहित तरीके से आयोजित कराने पर केंद्रित है।
