झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद: सरकार से वार्ता के बाद सहमति, छात्र नेता देवेंद्र महतो का 15 दिनों से जारी अनशन समाप्त

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में सुधार और निष्पक्षता की मांग को लेकर चला आ रहा छात्र आंदोलन एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। राज्य सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों के बीच हुए विचार-विमर्श के बाद सहमति बन गई है। इस सकारात्मक वार्ता के बाद पिछले 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा की है।

Jharkhand JPSC JSSC News: सरकार और अभ्यर्थियों में बनी सहमति, छात्र नेता देवेंद्र महतो का अनशन समाप्त
Image Source: Dipika Pandey Singh

राज्य सरकार के मंत्रियों इरफान अंसारी और दीपिका पांडे सिंह ने प्रेस वार्ता के माध्यम से जानकारी दी कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अभ्यर्थियों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उचित निर्णय लिए जा रहे हैं।

24 दिनों से जारी था आंदोलन, सदर अस्पताल से हुआ अनशन का समापन

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रियाओं में सुधार की मांग को लेकर 'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच' के बैनर तले पिछले 24 दिनों से विभिन्न माध्यमों से विरोध व्यक्त किया जा रहा था। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो अनशन के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।

अस्पताल में चिकित्सकों की देखरेख के बीच भी अनशन जारी रहा। डॉक्टरों द्वारा लगातार उनके स्वास्थ्य सूचकांकों की निगरानी की जा रही थी। सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा आधिकारिक आश्वासन दिए जाने और मांग-पत्र पर सहमति बनने के बाद अनशन समाप्त कराने की प्रक्रिया पूरी की गई।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई और प्रक्रियात्मक निर्णय

परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जांच एजेंसियां भी अपनी कार्रवाई कर रही हैं। राज्य सीआईडी (CID) की टीम द्वारा JSSC कार्यालय में जांच पड़ताल की गई है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है। इस मामले में पुलिस एवं जांच एजेंसियों ने कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं।

इसके साथ ही, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी व प्रशासनिक त्रुटि को रोकने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के हितों की रक्षा करना राज्य प्रशासन की प्राथमिकता है।

राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक रुख

इस पूरे मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज देखने को मिलीं। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान निकालने के लिए तैयार है, जबकि विपक्षी दलों ने युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार के रुख पर सवाल उठाए थे।

दूसरी ओर, अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण की प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखेंगे। प्रशासन का ध्यान अब राज्य में आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं को सुचारू और विवाद-रहित तरीके से आयोजित कराने पर केंद्रित है।

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