दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस स्थित फैकल्टी ऑफ लॉ में सोमवार सुबह एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। उमंग भवन परिसर में पीएचडी (PhD) के एक छात्र ने अपने ही प्रोफेसर पर हमला कर दिया और बहस के दौरान उन्हें थप्पड़ जड़ दिए। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) सामने आने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और अनुशासनहीनता तथा गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप में आरोपी छात्र को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही पूरे डीयू कैंपस में उसकी एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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| Image Source: CCTV |
यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ऑफिस (Office of the Proctor) द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट, 1922 के 'ऑर्डिनेंस XV-B' (Ordinance XV-B) के तहत की गई है। घटना के बाद से ही कैंपस में शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं और शिक्षक संगठनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और देखते ही देखते छात्र ने प्रोफेसर पर थप्पड़ और घूंसे बरसाने शुरू कर दिए। हमले के कारण प्रोफेसर जमीन पर गिर पड़े। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन छात्र लगातार बहस करता रहा और दोबारा हमला करने का प्रयास करता दिखा।
अचानक हुए इस हमले के बाद प्रोफेसर का मेडिकल टेस्ट कराया गया है और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा दी है। अचानक हुई इस हिंसा से पूरा शैक्षणिक जगत सन्न है।
इस जांच समिति की अध्यक्षता रसायनशास्त्र विभाग के प्रो. राजीव गुप्ता कर रहे हैं, जबकि इतिहास विभाग के प्रो. विपुल सिंह और हिंदी विभाग की प्रो. सुधा सिंह को इसका सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी पूरे घटनाक्रम, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों की समीक्षा कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रॉक्टर ऑफिस को सौंपेगी। प्रॉक्टर ऑफिस का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर छात्र के खिलाफ विश्वविद्यालय से स्थायी निष्कासन (Termination) जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षकों का कहना है कि अगर यूनिवर्सिटी परिसर में ही प्रोफेसरों पर इस तरह के जानलेवा हमले होंगे, तो शिक्षक बिना किसी डर के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे कर पाएंगे? शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि एडमिनिस्ट्रेशन को इस मामले में मिसाल कायम करने वाली सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी छात्र ऐसी अनैतिक और हिंसक हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
उमंग भवन में सुबह-सुबह क्या हुआ? CCTV में कैद हुई पूरी वारदात
जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे उमंग भवन (Faculty of Law, Law Centre Building) के पास हुई। आरोपी छात्र विधि संकाय (Faculty of Law) में सत्र 2024-25 (फेज-II) का पीएचडी रिसर्च स्कॉलर है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रोफेसर जैसे ही बिल्डिंग में प्रवेश कर रहे थे, छात्र वहां उनका इंतजार कर रहा था।दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और देखते ही देखते छात्र ने प्रोफेसर पर थप्पड़ और घूंसे बरसाने शुरू कर दिए। हमले के कारण प्रोफेसर जमीन पर गिर पड़े। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन छात्र लगातार बहस करता रहा और दोबारा हमला करने का प्रयास करता दिखा।
प्रोफेसर ने बयां किया दर्द: 'इंटरव्यू में सवाल पूछने का बना रहा था रंजिश'
घटना के शिकार हुए पीड़ित प्रोफेसर ने बताया कि वे आरोपी छात्र को पिछले साल पीएचडी एडमिशन के दौरान लिए गए इंटरव्यू के अलावा और किसी वजह से नहीं जानते थे। पीड़ित प्रोफेसर के मुताबिक, आरोपी छात्र हमला करते वक्त चिल्ला रहा था कि 'इंटरव्यू के दौरान मुझसे सवाल पूछने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?'अचानक हुए इस हमले के बाद प्रोफेसर का मेडिकल टेस्ट कराया गया है और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा दी है। अचानक हुई इस हिंसा से पूरा शैक्षणिक जगत सन्न है।
3 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन, निष्कासन की भी लटकी तलवार
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला बेहद गंभीर है। छात्र को सस्पेंड करने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र 3 सदस्यीय जांच समिति (Independent Enquiry Committee) का गठन किया गया है।इस जांच समिति की अध्यक्षता रसायनशास्त्र विभाग के प्रो. राजीव गुप्ता कर रहे हैं, जबकि इतिहास विभाग के प्रो. विपुल सिंह और हिंदी विभाग की प्रो. सुधा सिंह को इसका सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी पूरे घटनाक्रम, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों की समीक्षा कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रॉक्टर ऑफिस को सौंपेगी। प्रॉक्टर ऑफिस का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर छात्र के खिलाफ विश्वविद्यालय से स्थायी निष्कासन (Termination) जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस वारदात के सामने आते ही दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठनों (DUTA, AADTA, DTF) ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (AADTA) और दिल्ली टीचर्स फ्रंट (DTF) ने संयुक्त बयान जारी कर कैंपस में शिक्षकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है।शिक्षकों का कहना है कि अगर यूनिवर्सिटी परिसर में ही प्रोफेसरों पर इस तरह के जानलेवा हमले होंगे, तो शिक्षक बिना किसी डर के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे कर पाएंगे? शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि एडमिनिस्ट्रेशन को इस मामले में मिसाल कायम करने वाली सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी छात्र ऐसी अनैतिक और हिंसक हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
