वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाते हुए भारत और ब्राजील ने दूरसंचार तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। पुणे में आयोजित ब्रिक्स आईसीटी ट्रैक बैठक के दौरान यह रणनीतिक समझौता संपन्न हुआ। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और भविष्य की तकनीकों में तालमेल स्थापित करना है।
इस महत्वपूर्ण समझौते पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील के संचार मंत्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो ने हस्ताक्षर किए। यह कदम भारत और ब्राजील की उस साझा दृष्टि को दर्शाता है, जिसके तहत दोनों देश डिजिटल विभाजन को कम करने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपने नागरिकों का सशक्तिकरण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इसके अलावा, डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) कनेक्टिविटी, लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) जैसी उभरती अंतरिक्ष-आधारित संचार तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्पेक्ट्रम प्रबंधन और उपग्रह कक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान डिजिटल कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
पुणे में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ज्ञापन भारत और ब्राजील के संबंधों को एक नई दिशा देगा। सार्वभौमिक कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में यह सहयोग दोनों देशों को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
डिजिटल समावेशन और सार्थक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर समाज के हर वर्ग तक आधुनिक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, यह ढांचा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और हरित तकनीकों को अपनाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
संक्षेप में, पुणे में संपन्न हुआ यह समझौता ज्ञापन भारत-ब्राजील तकनीकी संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। यह न केवल दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच तकनीकी सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।
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तकनीकी सहयोग और नए युग की प्रौद्योगिकियां
यह द्विपक्षीय समझौता केवल पारंपरिक दूरसंचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की क्रांतिकारी तकनीकों को अपने दायरे में लेता है। समझौते के तहत दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 5जी और अगली पीढ़ी की 6जी नेटवर्क प्रणाली, ओपन आरएएन (Open RAN), तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।इसके अलावा, डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) कनेक्टिविटी, लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) जैसी उभरती अंतरिक्ष-आधारित संचार तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्पेक्ट्रम प्रबंधन और उपग्रह कक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान डिजिटल कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
Strengthening India-Brazil cooperation in the digital and telecom space! 🇮🇳🤝🇧🇷
— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) August 21, 2026
Signed an MoU for cooperation in ICTs with Mr. Frederico de Siqueira Filho, Minister of Communications, Brazil, on the sidelines of the 12th BRICS Communications Ministers Meeting in Pune to further… pic.twitter.com/t7QLGcIEfw
डिजिटल अवसंरचना और वैश्विक कनेक्टिविटी
भौतिक और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार और सबमरीन केबल अवसंरचना का विकास दोनों देशों की प्राथमिकता में शामिल है। इस नेटवर्क से न केवल डेटा ट्रांसफर की गति और सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्बाध कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित की जा सकेगी।पुणे में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ज्ञापन भारत और ब्राजील के संबंधों को एक नई दिशा देगा। सार्वभौमिक कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में यह सहयोग दोनों देशों को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
सुरक्षा, समावेशन और सतत विकास पर जोर
आधुनिक डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा सर्वोपरि बनकर उभरी हैं। इस समझौते में साइबर सुरक्षा के मजबूत तंत्र विकसित करने, उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण और डिजिटल परिवर्तन को सुरक्षित बनाने के लिए संयुक्त प्रयासों पर बल दिया गया है।डिजिटल समावेशन और सार्थक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर समाज के हर वर्ग तक आधुनिक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, यह ढांचा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और हरित तकनीकों को अपनाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
पारस्परिक लाभ और भावी रणनीति
यह समझौता समानता, पारस्परिक लाभ और सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है। दोनों देश नियमित रूप से सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, नीतिगत ढांचे और नियामक अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगे। निजी नेटवर्क के विकास और डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए दोनों पक्ष मिलकर नीतियां तैयार करेंगे।संक्षेप में, पुणे में संपन्न हुआ यह समझौता ज्ञापन भारत-ब्राजील तकनीकी संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। यह न केवल दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच तकनीकी सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।
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