भारत और उज़्बेकिस्तान के ऐतिहासिक एवं कूटनीतिक संबंधों ने एक नया मील का पत्थर हासिल कर लिया है। ताशकंद की अपनी चौथी आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ एक ऐतिहासिक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया। अपनी यात्रा के दौरान मिले आत्मीय और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उज़्बेकिस्तान की जनता और राष्ट्रपति का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच लगातार प्रगाढ़ हो रहे संबंधों, गहरे समन्वय और अटूट मित्रता की प्रत्यक्ष गवाही देता है। पिछले एक दशक में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच दस से अधिक मुलाकातें हो चुकी हैं, जो द्विपक्षीय प्राथमिकताओं की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करती हैं।
उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में स्थित है और भारत की क्षेत्रीय सहभागिता नीति का मुख्य स्तंभ माना जाता है। दोनों राष्ट्रों की विकासवादी सोच और भविष्य की आकांक्षाओं में अभूतपूर्व समानताएं हैं। जहां उज़्बेकिस्तान 'यांगी उज़्बेकिस्तान' (नया उज़्बेकिस्तान) के निर्माण के विज़न पर काम कर रहा है, वहीं भारत 'विकसित भारत 2047' के महान लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है। इन दोनों राष्ट्रीय संकल्पों के केंद्र में युवा शक्ति, नवाचार, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक जैसे महत्वपूर्ण स्तंभ मौजूद हैं। इसी साझा दृष्टिकोण पर आधारित यह साझेदारी दोनों देशों के नागरिकों के बेहतर और समृद्ध भविष्य को आकार दे रही है।
व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम देते हुए दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹47,500 करोड़ (5 बिलियन डॉलर) तक पहुँचाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विशाल आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देश बाज़ार तक सुगम पहुँच (मार्केट एक्सेस), निर्बाध कनेक्टिविटी, बैंकिंग प्रणालियों और आधुनिक पेमेंट गेटवे से जुड़े विषयों पर व्यवस्थागत और नीतिगत रूप से आगे बढ़ेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में परस्पर लाभ (Win-Win) वाले सहयोग को बढ़ावा देने पर भी दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की है।
कृषि और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी दोनों देशों की शक्तियां एक-दूसरे की पूरक साबित हो रही हैं। उज़्बेकिस्तान के पास बागवानी (हॉर्टिकल्चर) का लंबा अनुभव है, जबकि भारत आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीक में अग्रणी है। इन दोनों शक्तियों के मिलन से दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा को नया बल मिलेगा। इसी प्रकार उज़्बेकिस्तान की जड़ी-बूटियों (मेडिसिनल हर्ब्स) और भारत की पारंपरिक आयुर्वेद विशेषज्ञता का प्राकृतिक मेल स्वास्थ्य क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। पारंपरिक चिकित्सा पर हुए नए समझौते से इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे।
क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के संदर्भ में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को पूरे क्षेत्र के लिए सबसे गंभीर चुनौती माना गया है। भारत और उज़्बेकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि इन राष्ट्र-विरोधी ताकतों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प अटल रहेगा। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखेंगे।
खेलकूद भी दोनों देशों के संबंधों का एक आकर्षक पहलू बनकर उभरा है। शतरंज के वैश्विक पटल पर दोनों देशों के युवा सितारे अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। गोवा में आयोजित FIDE वर्ल्ड कप जीतने वाले उज़्बेक ग्रैंडमास्टर सिंदारोव और भारत के विश्वस्तरीय शतरंज चैंपियन डी. गुकेश के बीच आगामी नवंबर में होने वाले मुकाबले को लेकर दुनिया भर में उत्सुकता है। साथ ही, समरकंद में आयोजित होने वाले शतरंज ओलंपियाड तथा कुराश और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों के माध्यम से खेल कूटनीति को नई ऊर्जा दी जा रही है। ताशकंद की यह ऐतिहासिक वार्ता न केवल मध्य एशिया में शांति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि दोनों देशों को विकास के नए शिखरों पर ले जाएगी।
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कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और ₹47,500 करोड़ व्यापार का लक्ष्य
वर्ष 2026 भारत और उज़्बेकिस्तान की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के 15वें वर्ष का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाते हुए दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत कर 'कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' (व्यापक रणनीतिक साझेदारी) का दर्जा देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। इस नए और महत्वाकांक्षी ढांचे के तहत तेज़ गति से काम करने और ठोस परिणाम हासिल करने का खाका तैयार किया गया है। आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। हाल ही में दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय व्यापार ₹9,500 करोड़ (1 बिलियन डॉलर) के आंकड़े को पार कर चुका है।व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम देते हुए दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹47,500 करोड़ (5 बिलियन डॉलर) तक पहुँचाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विशाल आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देश बाज़ार तक सुगम पहुँच (मार्केट एक्सेस), निर्बाध कनेक्टिविटी, बैंकिंग प्रणालियों और आधुनिक पेमेंट गेटवे से जुड़े विषयों पर व्यवस्थागत और नीतिगत रूप से आगे बढ़ेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में परस्पर लाभ (Win-Win) वाले सहयोग को बढ़ावा देने पर भी दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की है।
भविष्य की तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए दोनों देश भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व विस्तार दे रहे हैं। भारत और उज़्बेकिस्तान अब डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, स्पेस टेक्नोलॉजी और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे दूरगामी क्षेत्रों में साझीदारी बढ़ा रहे हैं। तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा का यह तालमेल भारत और उज़्बेकिस्तान के रिश्तों को अधिक प्रासंगिक और 'फ्यूचर-रेडी' बना रहा है।कृषि और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी दोनों देशों की शक्तियां एक-दूसरे की पूरक साबित हो रही हैं। उज़्बेकिस्तान के पास बागवानी (हॉर्टिकल्चर) का लंबा अनुभव है, जबकि भारत आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीक में अग्रणी है। इन दोनों शक्तियों के मिलन से दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा को नया बल मिलेगा। इसी प्रकार उज़्बेकिस्तान की जड़ी-बूटियों (मेडिसिनल हर्ब्स) और भारत की पारंपरिक आयुर्वेद विशेषज्ञता का प्राकृतिक मेल स्वास्थ्य क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। पारंपरिक चिकित्सा पर हुए नए समझौते से इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे।
रक्षा, आतंकवाद-विरोधी संकल्प और क्षेत्रीय जुड़ाव
दोनों देशों के प्रशासनिक संबंधों को केवल दो राजधानियों—नई दिल्ली और ताशकंद—तक सीमित न रखकर राज्यों और शहरों के स्तर पर सीधी भागीदारी (City-to-State Partnerships) स्थापित की जा रही है। इससे शहरी प्रबंधन, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में सीधा संवाद और बुनियादी जुड़ाव बढ़ेगा। सुरक्षा और रक्षा के मोर्चे पर दोनों राष्ट्रों के बीच बना गहरा विश्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भविष्य में दोनों देशों की रक्षा निर्माण इकाइयों के बीच डायरेक्ट लिंकेज, सह-उत्पादन (co-production) और सह-विकास (co-development) को बढ़ावा देने की योजना है।क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के संदर्भ में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को पूरे क्षेत्र के लिए सबसे गंभीर चुनौती माना गया है। भारत और उज़्बेकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि इन राष्ट्र-विरोधी ताकतों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प अटल रहेगा। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखेंगे।
सांस्कृतिक धरोहर, खेल और जन-सहयोग को प्रोत्साहन
भारत और उज़्बेकिस्तान के संबंधों की असली ताकत उनकी साझी सांस्कृतिक विरासत में निहित है। द्विपक्षीय शिखर वार्ता के दौरान उज़्बेकिस्तान में स्थित बौद्ध विरासत स्थलों (Buddhist Heritage Sites) के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए मिलकर काम करने पर विशेष बल दिया गया। दोनों देशों के युवाओं, छात्रों और पेशेवरों के बीच परस्पर विनिमय (exchanges) बढ़ाना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'प्रोग्राम ऑफ कोऑपरेशन' पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही उज़्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु विशेष छात्रवृत्तियों (Scholarships) की घोषणा की गई है।खेलकूद भी दोनों देशों के संबंधों का एक आकर्षक पहलू बनकर उभरा है। शतरंज के वैश्विक पटल पर दोनों देशों के युवा सितारे अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। गोवा में आयोजित FIDE वर्ल्ड कप जीतने वाले उज़्बेक ग्रैंडमास्टर सिंदारोव और भारत के विश्वस्तरीय शतरंज चैंपियन डी. गुकेश के बीच आगामी नवंबर में होने वाले मुकाबले को लेकर दुनिया भर में उत्सुकता है। साथ ही, समरकंद में आयोजित होने वाले शतरंज ओलंपियाड तथा कुराश और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों के माध्यम से खेल कूटनीति को नई ऊर्जा दी जा रही है। ताशकंद की यह ऐतिहासिक वार्ता न केवल मध्य एशिया में शांति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि दोनों देशों को विकास के नए शिखरों पर ले जाएगी।
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