राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का पहला दिन कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसलों वाला रहा। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय महाकुंभ के पहले दिन दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन करते हुए सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का शानदार स्वागत किया। स्वागत स्थल पर तमिलनाडु के मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर का बैकड्रॉप लगाया गया था, जिसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और समृद्ध वास्तुकला की झलक पूरी दुनिया के सामने पेश की गई।
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सम्मेलन की शुरुआत से ही वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और सतत विकास जैसे मुद्दों पर गहन मंथन शुरू हो गया। विस्तारित ब्रिक्स समूह के नए और पुराने सदस्यों ने एक सुर में बहुपक्षवाद को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
सर्वसम्मति से पारित हुआ ऐतिहासिक न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन 2026
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 का सर्वसम्मति से पारित होना रही। गहन वार्ता और विचार-विमर्श के बाद बिना किसी आपत्ति के सभी 11 सदस्य देशों ने इस साझा घोषणापत्र को अपनी मंजूरी दी। इस घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर विशेष जोर दिया गया है।
घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार में मनमाने ढंग से लगाए जाने वाले एकतरफा शुल्क और प्रतिबंधों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत पारदर्शी व्यापार प्रणाली का समर्थन किया गया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में तत्काल और व्यापक सुधार की मांग की गई ताकि ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक मंचों पर सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
आतंकवाद के खिलाफ ब्रिक्स देशों ने जीरो टॉलरेंस की नीति को रेखांकित किया। घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों और आतंकी फंडिंग को पूरी तरह समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई गई। पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए दुनिया से आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड खत्म करने का आह्वान किया गया।
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत
पहले दिन का सबसे चर्चित और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक रही। दोनों नेताओं के बीच यह अहम मुलाकात करीब 50 मिनट तक चली। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव घटाने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में इस बैठक को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा दिए गए सहयोग के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आभार जताया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों के रूप में भारत और चीन को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना चाहिए। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को आपसी संबंधों के निरंतर विकास की मूल शर्त माना।
वैश्विक शासन और ग्लोबल साउथ की मजबूती के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव
शिखर सम्मेलन के दौरान समावेशी वैश्विक शासन पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आकार देने वाला एक मजबूत माध्यम बन चुका है।
पीएम मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए 10 सूत्रीय उपायों का प्रस्ताव रखा, जिन्हें अगले शिखर सम्मेलन तक एक स्पष्ट रोडमैप में बदलने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई को पाटने के लिए नवाचार, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल विकास मॉडल को अपनाना अनिवार्य है।
शाही गाला डिनर में दिखी वैश्विक एकजुटता की सांस्कृतिक झलक
पहले दिन के औपचारिक सत्रों और उच्च स्तरीय बैठकों के समापन के बाद भारत मंडपम में भव्य गाला डिनर का आयोजन किया गया। इस विशेष डिनर में ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और आमंत्रित वैश्विक संगठनों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
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गाला डिनर के दौरान मेहमानों को भारत की विविधतापूर्ण खान-पान और सांस्कृतिक कलाकृतियों से रूबरू कराया गया। वैश्विक नेताओं ने सौहार्दपूर्ण माहौल में अनौपचारिक चर्चा की, जिससे देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ आपसी विश्वास को भी बल मिला। यह आयोजन भारत की आतिथ्य परंपरा और 'वसुधैव कुटुंबकम' के विचार का जीवंत उदाहरण साबित हुआ।
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