महिला पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बड़ा विरोध प्रदर्शन

देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और गरिमा पर मंडराते संकट को लेकर आज मीडिया जगत ने एक बड़ा मंच साझा करने का निर्णय लिया है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI), दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) और नेशनल वूमेंस नेटवर्क ऑफ इंडिया (NWNI) के संयुक्त तत्वावधान में आज नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया परिसर में एक व्यापक विरोध सभा का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महिला पत्रकारों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, पुलिसिया उत्पीड़न और प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिशों का विरोध करना है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में महिला पत्रकारों के उत्पीड़न और मीडिया पर कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

महिला पत्रकारों के उत्पीड़न और पुलिसिया बदसलूकी पर फूटा आक्रोश

हाल के समय में महिला पत्रकारों पर हुए हमलों ने मीडिया बिरादरी में गहरा असंतोष पैदा किया है। दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन के अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ की गई कथित बर्बरता की घटना इसका प्रमुख उदाहरण है। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान दोनों पत्रकारों को पुलिस कर्मियों द्वारा न केवल घसीटकर हिरासत में लिया गया, बल्कि थाने में उनके साथ मारपीट करने और धार्मिक पहचान को लेकर अभद्र टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वूमेंस प्रेस कॉर्प्स (IWPC) और अन्य संगठनों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से इस मामले में शामिल दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही सहारनपुर मस्जिद डिमोलिशन और रेड चिली लाइव की पत्रकार पूजा माथुर पर एफआईआर की कार्रवाई जैसे मामलों ने भी पत्रकारों की स्वतंत्रता पर खड़े होते सवालों को और गहरा कर दिया है।

कोच्चि में 'रिपोर्टर टीवी' के दफ्तर में पुलिस की छापेमारी की कड़ी निंदा

प्रेस की आजादी पर हमले का एक और बड़ा मामला केरल से सामने आया, जहाँ 16 सितंबर 2026 की सुबह लगभग 5 बजे केरल पुलिस ने कोच्चि स्थित 'रिपोर्टर टीवी' के न्यूजरूम में प्रवेश किया। पुलिस ने लगभग डेढ़ घंटे तक न्यूजरूम में मौजूद रहकर लाइव प्रसारण को बाधित किया और ऑन-ड्यूटी न्यूज एडिटर को जबरन उनकी डेस्क से हटा दिया। इतना ही नहीं, पुलिस ने पत्रकारों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने केरल पुलिस के इस रवैये की तीखी निंदा की है। PCI का कहना है कि चैनल के मालिकों से जुड़े एक प्रशासनिक मामले की आड़ लेकर न्यूजरूम में घुसना और निष्पक्ष पत्रकारों को डराना संविधान द्वारा दिए गए प्रेस की स्वतंत्रता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। PCI ने केरल पुलिस से तत्काल पत्रकारों के मोबाइल वापस लौटाने और ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की है।

ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों पर कसता सोशल मीडिया सेंसरशिप का शिकंजा

पत्रकारों को केवल धरातल पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी निशाना बनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौतों से जुड़ी जनस्वास्थ्य आपातस्थिति की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे तीन स्वतंत्र पत्रकारों—मोनिका सिंह (@monikasingh_unsalted), बिंदु गुर्जर (@samacharbybindu) और लोकभद्र सिंह (@lok_singh_) के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को 6 सितंबर 2026 को निलंबित कर दिया गया।

रिपोर्टिंग के दौरान इन पत्रकारों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा दबाव बनाया गया, होटल खाली करने को कहा गया और सादे कपड़ों में पुलिस निगरानी में रखा गया। PCI ने सोशल मीडिया कंपनियों और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्वतंत्र रिपोर्टिंग को दबाने के लिए डिजिटल अकाउंट्स के निलंबन की पारदर्शी जांच की जाए और पत्रकारों को बिना किसी डर के रिपोर्टिंग करने की अनुमति दी जाए।

आज शाम 4 बजे प्रेस क्लब में एकजुटता का आह्वान

इन लगातार घटती घटनाओं को देखते हुए आज शाम 4 बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित होने वाली विरोध सभा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पत्रकार संगठनों ने देश के सभी पत्रकारों, नागरिक संगठनों और प्रेस की स्वतंत्रता में विश्वास रखने वाले लोगों से इस बैठक में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है।

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