नई दिल्ली, 24 जून 2026: देश की सत्ता के सबसे शक्तिशाली गलियारे—संसद भवन और केंद्रीय मंत्रालयों से चंद कदमों की दूरी पर स्थित पूर्व निर्माण भवन साइट पर आज तड़के एक बड़ा हादसा हो गया। उद्योग भवन के पास चल रही एक बहु-करोड़ी सरकारी परियोजना में काम कर रहे एक हजार से अधिक निर्माण श्रमिकों के अस्थायी आवासीय परिसर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में किसी तरह मज़दूरों ने भागकर अपनी जान तो बचाई, लेकिन उनकी जीवनभर की गाढ़ी कमाई, ज़रूरी दस्तावेज़ और नगदी जलकर पूरी तरह राख हो गए।

इस भयावह घटना के बाद देश के प्रमुख श्रमिक संगठन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। AICCTU की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुचेता डे ने एक कड़ा प्रेस बयान जारी कर इसे महज़ एक 'दुर्घटना' मानने से साफ इनकार कर दिया है। संगठन का सीधा आरोप है कि यह एक 'मैन्युफैक्चर्ड डिजास्टर' यानी प्रायोजित आपदा है, जो निर्माण कंपनी अहलुवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड की आपराधिक लापरवाही की वजह से घटित हुआ है।
प्रत्यक्षदर्शी श्रमिकों के अनुसार, रात लगभग दो बजे अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। चूंकि कंपनी ने श्रमिकों के लिए कोई केंद्रीय रसोईघर या अग्निशमन के उपाय नहीं किए थे, इसलिए मज़दूरों को अपने छोटे कमरों के भीतर ही घरेलू एलपीजी सिलेंडर रखने पड़ते थे। बिजली की चिंगारी भड़कते ही सिलेंडर एक के बाद एक बम की तरह फटने लगे, जिसने पूरे परिसर को पल भर में एक जलते हुए नरक में तब्दील कर दिया।
"यदि देश की संसद और श्रम मंत्रालय की छांव में श्रम कानूनों को इस तरह जलाकर राख किया जा सकता है, तो भारत के बाकी हिस्सों में काम करने वाले करोड़ों मज़दूरों के लिए क्या उम्मीद बचती है?" — सुचेता डे, उपाध्यक्ष, AICCTU
इसके साथ ही पीड़ित निर्माण श्रमिकों को उनके नुकसान का पूरा और उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए और सभी निर्माण श्रमिकों का दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में तत्काल अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। अंत में संगठन ने मांग की है कि घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अपनी सुस्ती छोड़े और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाली इस निर्माण कंपनी के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज कराए।

झुग्गी की आग नहीं, टीन के कमरों में बना 'मौत का कुआं'
श्रमिक संगठन ने मुख्यधारा की मीडिया के एक धड़े द्वारा इस घटना को 'झुग्गियों की आग' के रूप में दिखाए जाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनधिकृत स्लम एरिया नहीं था, बल्कि निर्माण कंपनी अहलुवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स द्वारा अपने श्रमिकों के लिए बनाया गया एक संकरा, धातु की चादरों का कंपार्टमेंटलाइज्ड आवासीय परिसर था।प्रत्यक्षदर्शी श्रमिकों के अनुसार, रात लगभग दो बजे अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। चूंकि कंपनी ने श्रमिकों के लिए कोई केंद्रीय रसोईघर या अग्निशमन के उपाय नहीं किए थे, इसलिए मज़दूरों को अपने छोटे कमरों के भीतर ही घरेलू एलपीजी सिलेंडर रखने पड़ते थे। बिजली की चिंगारी भड़कते ही सिलेंडर एक के बाद एक बम की तरह फटने लगे, जिसने पूरे परिसर को पल भर में एक जलते हुए नरक में तब्दील कर दिया।
शॉर्ट सर्किट की शिकायतों को कंपनी ने किया था दरकिनार
ट्रेड यूनियन का आरोप है कि इस तबाही की पटकथा कई दिनों से लिखी जा रही थी। श्रमिकों ने पिछले कई दिनों से परिसर में बार-बार हो रहे खतरनाक शॉर्ट सर्किट को लेकर सुपरवाइजर, ठेकेदार और परियोजना प्रशासन को आगाह किया था। लेकिन साइट के इलेक्ट्रिशियन ने यह कहकर सुरक्षा सुधार करने से मना कर दिया कि कंपनी की तरफ से इसे ठीक करने का कोई आदेश नहीं है।"यदि देश की संसद और श्रम मंत्रालय की छांव में श्रम कानूनों को इस तरह जलाकर राख किया जा सकता है, तो भारत के बाकी हिस्सों में काम करने वाले करोड़ों मज़दूरों के लिए क्या उम्मीद बचती है?" — सुचेता डे, उपाध्यक्ष, AICCTU
AICCTU की मुख्य मांगें: श्रम मंत्रालय उठाए कड़े कदम
संसद क्षेत्र और सेंट्रल विस्टा जैसी हाई-सिक्योरिटी और अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं के बीचोबीच ऐसी दागी कंपनी को बार-बार टेंडर दिए जाने पर सवाल उठाते हुए AICCTU ने अपनी मांगें रखी हैं। संगठन ने कहा है कि संसद भवन और उसके आसपास चल रहे सभी निर्माण स्थलों पर श्रम कानूनों के उल्लंघन की तुरंत निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।इसके साथ ही पीड़ित निर्माण श्रमिकों को उनके नुकसान का पूरा और उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए और सभी निर्माण श्रमिकों का दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में तत्काल अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। अंत में संगठन ने मांग की है कि घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अपनी सुस्ती छोड़े और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाली इस निर्माण कंपनी के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज कराए।
(नोट: यह रिपोर्ट श्रमिक संगठन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज पर आधारित है। इस मामले में संबंधित निर्माण कंपनी या प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)
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