JPSC JSSC Protest: सरकार और छात्रों की वार्ता खत्म, CBI जांच पर फंसा पेंच, CM हेमंत संग होगी अगली बैठक

झारखंड में पिछले दो हफ्तों से गरमाया JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं का विवाद अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुका है। मोराबादी स्थित राज्य अतिथि गृह में छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार द्वारा गठित मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति के बीच पहली औपचारिक बैठक संपन्न हो गई है। लंबे समय से सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच बातचीत के रास्ते खुलना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, करीब दो घंटे तक चली इस लंबी वार्ता के बावजूद अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांग पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है। इस वार्ता के बाद भी अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

JPSC JSSC Protest: सरकार और छात्रों की वार्ता खत्म, CBI जांच पर फंसा पेंच, CM हेमंत संग होगी अगली बैठक
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सीबीआई जांच की मुख्य मांग पर फंसा पेंच

इस बैठक का सबसे केंद्रीय बिंदु परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक की स्वतंत्र जांच था। छात्र प्रतिनिधियों ने 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पैनल से कराने पर जोर दिया। अभ्यर्थियों का तर्क है कि वर्तमान में चल रही CID जांच पर उनका भरोसा पूरी तरह उठ चुका है, इसलिए पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दखल जरूरी है। दूसरी तरफ, सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने इस मांग पर तत्काल कोई फैसला लेने से परहेज किया। मंत्रियों की समिति का कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया जारी है और सीबीआई जांच का फैसला राज्य के सर्वोच्च स्तर यानी मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल और 5 सदस्यीय सरकारी समिति की बैठक

बातचीत की मेज पर अभ्यर्थियों की ओर से जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रमुख छात्र नेताओं ने किया और उन्होंने परीक्षाओं में ओएमआर शीट में गड़बड़ी, उत्तर पुस्तिकाओं के सार्वजनिक प्रकाशन और कट-ऑफ अंक जारी करने जैसी कई तकनीकी खामियों को भी सरकार के सामने मजबूती से रखा। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति में शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री चंपाई सोरेन समर्थित नेता, चमरा लिंडा, दीपिका पांडे सिंह, संजय सिंह और विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह शामिल रहे। सरकारी पक्ष ने छात्र प्रतिनिधियों की हर बात को सुना और उनकी सभी मांगों व सुझावों को एक विस्तृत रिपोर्ट के रूप में दर्ज किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगली बैठक पर टिकी निगाहें

मंत्रियों के साथ हुई इस बैठक के समाप्त होने के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में होने वाली अगली उच्चस्तरीय बैठक में ही लिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मीडिया के माध्यम से यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार युवाओं और छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में रहकर छात्रों की समस्याओं का ठोस और व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य के सभी जिलों के युवाओं और शिक्षाविदों से भी सुझाव एकत्र करने की बात कही है, ताकि भर्ती प्रक्रियाओं में स्थाई और पारदर्शी सुधार लागू किए जा सकें। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली अगली निर्णायक वार्ता पर टिकी हैं।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन और आंदोलन जारी

सरकार के साथ पहली दौर की बातचीत भले ही सकारात्मक माहौल में हुई हो, लेकिन मांगों पर अंतिम निर्णय न होने के कारण रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा धरना-प्रदर्शन थमा नहीं है। अभ्यर्थी पिछले दो हफ्तों से बारिश और विपरीत मौसम के बावजूद अपने अधिकार के लिए डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर कई अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनमें से कुछ की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा है। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने विधानसभा मार्च और मशाल जुलूस निकालकर सरकार पर दबाव बनाए रखा है। राज्यभर से आम नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी इन आंदोलनकारी छात्रों को लगातार मिल रहा है।

आगे क्या होगा: छात्रों की रणनीति और सरकार का रुख

छात्र नेताओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वे बातचीत के खिलाफ नहीं हैं और सरकार का रुख पहले की तुलना में बदला जरूर है, लेकिन केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की सिफारिश का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, सरकार की रणनीति यह है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर होने वाली अगली बैठक में कानून विशेषज्ञों की सलाह के बाद कोई बीच का रास्ता निकाला जाए। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि आगामी बैठक में हेमंत सोरेन सरकार युवाओं के आक्रोश को शांत करने के लिए क्या ऐतिहासिक निर्णय लेती है।

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