दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के तहत आने वाली एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक बेहद शातिर और खूंखार 'फर्लो जम्पर' (जेल से छुट्टी मिलने के बाद फरार होने वाले अपराधी) को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी हत्या और लूट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था और अपनी दो हफ्ते की फर्लो (छुट्टी) की अवधि समाप्त होने के बाद जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय फरार हो गया था। दिल्ली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस भगोड़े अपराधी को दबोचकर कानून के शिकंजे में वापस ला खड़ा किया है।
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यह पूरा कामयाब ऑपरेशन दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों जैसे स्पेशल सीपी (क्राइम) एच.जी.एस. धालीवाल, जॉइंट सीपी धीरज कुमार और एडिशनल सीपी अभिषेक धनिया के कड़े दिशा-निर्देशों में पूरा हुआ। क्राइम ब्रांच के डीसीपी गौरव गुप्ता ने बताया कि दिल्ली को सुरक्षित रखने और कानून का मज़ाक उड़ाने वाले भगोड़ों को सबक सिखाने के लिए पुलिस इस तरह के विशेष अभियान लगातार चला रही है।
जेल से मिली थी दो हफ्ते की छुट्टी, पर नीयत बदल गई
पकड़े गए इस शातिर अपराधी का नाम राकेश उर्फ ओम प्रकाश है, जिसकी उम्र करीब 50 साल है। वह दिल्ली के नांगलोई इलाके की अमर कॉलोनी का रहने वाला है। सालों से जेल की सलाखों के पीछे बंद राकेश को बीते 30 अप्रैल 2026 को जेल के महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) के आदेश पर दो हफ्ते की फर्लो यानी विशेष छुट्टी दी गई थी। फर्लो का नियम सीधा होता है कि छुट्टी खत्म होने के बाद कैदी को खुद आकर जेल में हाजिर होना पड़ता है।
नियम के मुताबिक राकेश को 15 मई 2026 को दिल्ली की मण्डोली जेल (सेंट्रल जेल नंबर 14) में आत्मसमर्पण करना था। लेकिन बाहर की खुली हवा लगते ही राकेश की नीयत डोल गई और वह जेल लौटने के बजाय फरार हो गया। जब वह तय तारीख पर नहीं पहुंचा, तो मण्डोली जेल के अधीक्षक ने 1 जून 2026 को एक वायरलेस संदेश जारी कर पुलिस को उसके भागने की सूचना दी।
खुफिया जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेरा
जेल से वायरलेस मैसेज मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स इस भगोड़े की तलाश में जुट गई। एसीपी राजेश शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर राकेश दुहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें सब-इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र कुमार और हेड कांस्टेबल भूपेंद्र शामिल थे। पुलिस टीम लगातार राकेश के संभावित ठिकानों पर नजर रख रही थी।
इसी बीच 20 जून 2026 को पुलिस टीम को एक गुप्त जानकारी मिली कि राकेश दिल्ली के बाहरी जिला इलाके में कहीं छुपा हुआ है और वहां से भागने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए बताए गए इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस ने ऐसा जाल बिछाया कि राकेश को संभलने का मौका ही नहीं मिला और टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा।
24 साल पुराना वो खौफनाक मर्डर और लूटकांड
अब आपको बताते हैं कि राकेश आखिर कितना खतरनाक अपराधी है और उसे उम्रकैद क्यों हुई थी। यह मामला आज से करीब 24 साल पुराना यानी साल 2002 का है। 28 फरवरी 2002 को राकेश ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में एक बेहद सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था। मिलिट्री रोड पर सत्य नारायण मंदिर के ठीक सामने इन बदमाशों ने दिनदहाड़े एक कार सवार व्यक्ति को रोक लिया।
इन लोगों ने पीड़ित से 25 लाख रुपये से भरा कैश का बैग और उसकी सेंट्रो कार लूट ली। इस लूट के दौरान जब पीड़ित ने अपनी जमा-पूंजी बचाने के लिए इनका विरोध किया, तो राकेश ने बिना सोचे-समझे सीधे उसकी गर्दन पर गोली मार दी। गोली लगते ही उस व्यक्ति की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस खौफनाक दिनदहाड़े हुए मर्डर और डकैती से पूरी दिल्ली दहल गई थी। इसके बाद आनंद पर्वत थाने में मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद, नागलोई थाने का है 'बैड कैरेक्टर'
इस मामले का ट्रायल दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में चला। करीब 10 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और पुख्ता सबूतों के आधार पर 12 दिसंबर 2012 को कोर्ट की एडिशनल सेशंस जज सुश्री कावेरी बावेजा ने राकेश को हत्या और डकैती का असली दोषी माना। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास यानी उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई और साथ ही 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राकेश कोई सीधा इंसान नहीं है बल्कि वह एक आदतन और बेहद शातिर अपराधी है। दिल्ली के नांगलोई थाने में उसे 'बैड कैरेक्टर' (यानी इलाके का घोषित बदमाश) माना गया है। उसके खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों जैसे नागलोई, केशव पुरम, उत्तम नगर और आनंद पर्वत में हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती और अवैध हथियार रखने (आर्म्स एक्ट) के कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद राकेश को वापस जेल प्रशासन को सौंप दिया है, जहाँ उसे फिर से मण्डोली जेल की कालकोठरी में बंद कर दिया गया है।