
35.4% वैश्विक हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर भारत
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और पर्यावरण, जल लचीलापन और प्रतिस्पर्धी सर्कुलर अर्थव्यवस्था के लिए यूरोपियन कमिश्नर जेसिका रोसवाल के बीच हुई बैठक में भारतीय यार्ड्स की प्रगति की सराहना की गई। यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण बाजार में भारत की हिस्सेदारी साल 2024 के 30.1% से बढ़कर साल 2025 में 35.4% हो गई है। भारत ने साल 2025 के दौरान रिकॉर्ड 2.99 मिलियन ग्रॉस टन जहाजों की रीसाइक्लिंग की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत की भारी वृद्धि को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और जिम्मेदारीपूर्ण जहाज पुनर्चक्रण के लिए एक मजबूत वैश्विक हब के रूप में स्थापित हो चुका है।तीन भारतीय रीसाइक्लिंग यार्ड ईयू से मान्यता पाने के बेहद करीब
भारतीय जहाज पुनर्चक्रण सुविधाओं को यूरोपीय संघ के कड़े मानकों के अनुरूप ढालने के लिए बड़े पैमाने पर ऑडिट और अनुपालन प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में 30 से अधिक भारतीय रीसाइक्लिंग यार्ड्स ने यूरोपीय संघ से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है, जिनमें से छह यार्ड वर्तमान में मंजूरी की अंतिम प्रक्रियाओं से गुजर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तीन भारतीय जहाज पुनर्चक्रण सुविधाओं ने सभी कड़े वैश्विक मानकों और जरूरी नियमों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ये यार्ड अब ईयू शिप रिसाइक्लिंग रेगुलेशन फ्रेमवर्क के तहत सूचीबद्ध होने के लिए पूरी तरह से योग्य हो चुके हैं। भारत सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ इन यार्ड्स की लिस्टिंग और निरीक्षण में मदद कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों ने अपने बुनियादी ढांचे और काम करने के तौर-तरीकों में भारी निवेश किया है।पर्यावरण और कर्मचारियों की सुरक्षा के बेजोड़ इंतजाम
भारत में चल रहे जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड्स को सिर्फ व्यावसायिक नजरिए से नहीं, बल्कि पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से भी अपग्रेड किया गया है। इन सुविधाओं को मजबूत पर्यावरण इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों के कल्याणकारी उपायों का पूरा समर्थन प्राप्त है। भारतीय रीसाइक्लिंग हब में आधुनिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (STP), वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणालियां और रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा संचालित मल्टी-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के रहने के लिए विशेष आवासों की व्यवस्था की गई है। सरकार इन यार्ड्स का समय-समय पर और बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यावरण नियमों का पालन, कर्मचारियों की कार्यस्थल सुरक्षा और कामकाज की पारदर्शिता में उच्चतम वैश्विक मानकों को लगातार बनाए रखा जा सके।8 बिलियन डॉलर का महा-निवेश और भविष्य का मेगा प्लान
भारत ने इस क्षेत्र में अपने दीर्घकालिक विजन को साफ कर दिया है। सरकार का अगला लक्ष्य आने वाले एक दशक में लगभग 16,000 जहाजों को रीसाइकिल करना है। इस महा-योजना को अमलीजामा पहनाने और जहाज निर्माण व रीसाइक्लिंग सेक्टर के चौतरफा विकास के लिए भारत सरकार ने 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 66,000 करोड़ रुपये) की विशाल वित्तीय सहायता की घोषणा की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय रीसाइक्लिंग सुविधाओं की संख्या बढ़ने से ग्लोबल सर्कुलर इकोनॉमी को एक नई गति मिलेगी। इससे न केवल पर्यावरण के अनुकूल रीसाइक्लिंग के तरीकों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश में हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और समुद्री क्षेत्र में स्थिरता को मजबूती मिलेगी।यूरोपीय संघ का सकारात्मक रुख और संयुक्त कार्यकारी समूह का प्रस्ताव
भारत के इन प्रयासों और अब तक हुई प्रगति का यूरोपियन कमिश्नर जेसिका रोसवाल ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने इस सहयोग को और प्रभावी बनाने के लिए एक संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) के गठन का प्रस्ताव रखा है, जिसमें दोनों पक्षों के संबंधित मंत्रालयों और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। यूरोपीय संघ ने अनुपालन, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के भारत के तरीकों की तारीफ की है, हालांकि कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले इस विषय पर ईयू के सदस्य देशों के साथ आगामी ऑटम सेशन (शरद कालीन सत्र) के दौरान चर्चा की जाएगी। कमिश्नर रोसवाल ने यह भी इच्छा जताई कि मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह खुद भारत के इन आधुनिक जहाज पुनर्चक्रण यार्ड्स का दौरा करना चाहेंगी।भारत और यूरोपीय संघ के बीच की यह बातचीत दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी का एक बड़ा प्रमाण है। यूरोपीय संघ के ढांचे के तहत भारतीय रीसाइक्लिंग यार्ड्स को आधिकारिक मान्यता मिलने से न केवल वैश्विक रीसाइक्लिंग क्षमता मजबूत होगी, बल्कि जहाजों के जीवन-चक्र के अंत में उनके सुरक्षित निपटान में मदद मिलेगी। भारत सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दिखाते हुए मजबूत और टिकाऊ वैश्विक समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को एक नया और सुरक्षित आधार प्रदान करेगा।