दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण अंतरराज्यीय ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कानून से भाग रहे 50,000 रुपये के इनामी भगोड़े आरोपी मनोहरन कंडासामी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी बीते 12 से अधिक वर्षों से अदालती कार्यवाही और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वह राजनीतिक दलों और उच्च सरकारी अधिकारियों के नाम पर छपे फर्जी और जाली लेटरहेड के जरिए जालसाजी और धोखाधड़ी करने के एक अति-संवेदनशील मामले में मुख्य वांछित था।


यह मामला एफआईआर संख्या 33/2008 के तहत थाना मंदिर मार्ग, नई दिल्ली में भारतीय दंड संहिता की धारा 465 और 468 के अंतर्गत दर्ज हुआ था, जिसे बाद में जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और लगातार गैरहाजिर रहने के कारण वर्ष 2014 में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (CMM) की अदालत ने उसे औपचारिक रूप से भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया था।
हालांकि चोरी का सामान तो उसके पास से बरामद नहीं हो सका, लेकिन उसकी तलाशी लेने पर पुलिस के हाथ कई प्रिंटेड और सादे जाली लेटरहेड लगे। ये सभी दस्तावेज देश के प्रमुख राजनीतिक कार्यालयों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों के नाम से बने हुए थे। जब इन दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तो ये पूरी तरह से नकली और फर्जी पाए गए। इस बड़े षड्यंत्र का खुलासा होने पर वर्ष 2008 में धारा 465 और 468 के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया और दोनों मामलों को विस्तृत छानबीन के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया।
लगातार अदालत से अनुपस्थित रहने के कारण वर्ष 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया और उसकी गिरफ्तारी की राह आसान बनाने के लिए पुलिस ने 50,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा कर दी। इसके बावजूद आरोपी ने अपने सभी पुराने संपर्क काट लिए और दिल्ली एवं कर्नाटक को छोड़कर पूरी तरह गायब हो गया, जिससे कई सालों तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका।
जांच के दौरान टीम ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। पुराने और नए डिजिटल इनपुट्स का महीनों तक बारीकी से विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम तमिलनाडु में सक्रिय एक मोबाइल नंबर को चिह्नित करने में सफल रही। इसके बाद टीम ने तमिलनाडु के नामक्कल जिले के तिरुचेंगोडे क्षेत्र में फील्ड सर्विलांस शुरू किया और गहन छानबीन के बाद 4 अगस्त 2026 को तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में स्थित एक गोदाम से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
निरक्षर मनोहरन कंडासामी मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलोर का रहने वाला है। तमिलनाडु जाकर उसने अपनी असली पहचान छिपाई और तिरुचेंगोडे में एक बड़ा पोल्ट्री फार्म और मुर्गियों का कारोबार स्थापित कर लिया। वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। पिछले कई सालों से उसका परिवार इसी पोल्ट्री फार्म से होने वाली आय पर निर्भर था और वह एक सामान्य व्यापारी की आड़ में छिपकर कानून को गुमराह कर रहा था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि अपराध का रास्ता कितना भी पुराना हो, कानून के हाथ हमेशा आरोपी तक पहुँच ही जाते हैं।
चोरी की जांच से खुला फर्जीवाड़ा का बड़ा अंतरराज्यीय रैकेट
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2007 में दर्ज हुई एक साधारण चोरी की शिकायत से हुई थी। हैदराबाद निवासी 65 वर्षीय विजय कुमार ने नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 384/2007 दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि एक धर्मशाला में रुकने के दौरान उनकी अलमारी का ताला तोड़कर सोने के गहने और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने कर्नाटक के मूल निवासी मनोहरन कंडासामी को पकड़ा।हालांकि चोरी का सामान तो उसके पास से बरामद नहीं हो सका, लेकिन उसकी तलाशी लेने पर पुलिस के हाथ कई प्रिंटेड और सादे जाली लेटरहेड लगे। ये सभी दस्तावेज देश के प्रमुख राजनीतिक कार्यालयों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों के नाम से बने हुए थे। जब इन दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तो ये पूरी तरह से नकली और फर्जी पाए गए। इस बड़े षड्यंत्र का खुलासा होने पर वर्ष 2008 में धारा 465 और 468 के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया और दोनों मामलों को विस्तृत छानबीन के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया।
जमानत का दुरुपयोग और एक दशक लंबी फरारी
धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज के इस दूसरे मामले में क्राइम ब्रांच ने मनोहरन कंडासामी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। लगभग एक महीने तक जेल में रहने के बाद आरोपी को माननीय अदालत से जमानत मिल गई। अदालत से रिहा होते ही आरोपी ने कानूनी प्रक्रिया का जानबूझकर दुरुपयोग किया और मुकदमे की सुनवाई में शामिल होने के बजाय अचानक गायब हो गया।लगातार अदालत से अनुपस्थित रहने के कारण वर्ष 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया और उसकी गिरफ्तारी की राह आसान बनाने के लिए पुलिस ने 50,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा कर दी। इसके बावजूद आरोपी ने अपने सभी पुराने संपर्क काट लिए और दिल्ली एवं कर्नाटक को छोड़कर पूरी तरह गायब हो गया, जिससे कई सालों तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका।
क्राइम ब्रांच का हाई-टेक ऑपरेशन और तमिलनाडु में बिछा जाल
आरोपी को पकड़ने के लिए सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच के एसीपी सत्येंद्र मोहन के सीधे पर्यवेक्षण और डीसीपी आदित्य गौतम के दिशा-निर्देशों में एक विशेष टीम का गठन किया गया था।जांच के दौरान टीम ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। पुराने और नए डिजिटल इनपुट्स का महीनों तक बारीकी से विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम तमिलनाडु में सक्रिय एक मोबाइल नंबर को चिह्नित करने में सफल रही। इसके बाद टीम ने तमिलनाडु के नामक्कल जिले के तिरुचेंगोडे क्षेत्र में फील्ड सर्विलांस शुरू किया और गहन छानबीन के बाद 4 अगस्त 2026 को तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में स्थित एक गोदाम से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पोल्ट्री फार्मिंग के आड़ में छिपा था 62 वर्षीय आरोपी
लगातार पूछताछ के दौरान 62 वर्षीय आरोपी मनोहरन कंडासामी ने स्वीकार किया कि जमानत पर छूटने के बाद उसे सजा और दोबारा जेल जाने का गहरा डर था। इसी डर की वजह से उसने अपने सभी पुराने साथियों, रिश्तेदारों और परिचितों से संबंध पूरी तरह खत्म कर लिए थे। उसने अपनी पुरानी रिहाइश छोड़ दी और अपने परिवार के साथ तमिलनाडु में जाकर रहने लगा।निरक्षर मनोहरन कंडासामी मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलोर का रहने वाला है। तमिलनाडु जाकर उसने अपनी असली पहचान छिपाई और तिरुचेंगोडे में एक बड़ा पोल्ट्री फार्म और मुर्गियों का कारोबार स्थापित कर लिया। वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। पिछले कई सालों से उसका परिवार इसी पोल्ट्री फार्म से होने वाली आय पर निर्भर था और वह एक सामान्य व्यापारी की आड़ में छिपकर कानून को गुमराह कर रहा था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि अपराध का रास्ता कितना भी पुराना हो, कानून के हाथ हमेशा आरोपी तक पहुँच ही जाते हैं।
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