भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव निवर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से त्यागपत्र देने के बाद हुआ है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी का पहला बयान
नया दायित्व मिलने की खबर सामने आते ही प्रह्लाद जोशी ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा:
"मुझे अभी-अभी जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मुझे एक नई और बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। मैं इस दायित्व को अत्यंत कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता और समर्पण के साथ स्वीकार करता हूं। पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने हर क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन में शानदार काम किया है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी को निभाऊंगा।"
प्रह्लाद जोशी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को पारदर्शी, आधुनिक और विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना है।
छात्र संगठनों और विपक्ष के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य और परीक्षा प्रणाली में उनका विश्वास पुनर्स्थापित करना व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण है।
VIDEO | Delhi: After being appointed as Education Minister following Dharmendra Pradhan's resignation from the post, Union Minister Prahlad Joshi says, "I have just got to know that the Prime Minister has given me a responsibility. I accept this responsibility with a sense of… pic.twitter.com/o9LnWvjuOI
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2026
प्रह्लाद जोशी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को पारदर्शी, आधुनिक और विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना है।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
शिक्षा मंत्रालय में इस अचानक हुए फेरबदल की पृष्ठभूमि में हाल ही में आयोजित नीट-यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को मुख्य वजह माना जा रहा है।छात्र संगठनों और विपक्ष के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य और परीक्षा प्रणाली में उनका विश्वास पुनर्स्थापित करना व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण है।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी? जानें उनका पॉलिटिकल प्रोफाइल
कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा संसदीय क्षेत्र से लगातार 5 बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।- राजनीतिक सफर: वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार कुशलतापूर्वक संभाल चुके हैं।
- वर्तमान मंत्रालय: वर्तमान में वह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री हैं। अब इसके साथ ही वह शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे।
- अनुभव: अपनी प्रशासनिक पकड़ और संगठनात्मक क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले जोशी को मोदी सरकार के संकटमोचक नेताओं में शामिल माना जाता है।
नए शिक्षा मंत्री के सामने होंगी ये 4 बड़ी चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालते ही प्रह्लाद जोशी के सामने कई तात्कालिक और दीर्घकालिक चुनौतियां खड़ी हैं:- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन: देश में राष्ट्रीय परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठे सवालों के बाद NTA की कार्यप्रणाली में सुधार करना और छात्रों का विश्वास वापस जीतना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।
- पेपर लीक विरोधी कड़े नियमों का कार्यान्वयन: भविष्य में किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा का पेपर लीक न हो, इसके लिए केंद्र सरकार के नए कड़े कानूनों और डिजिटल सुरक्षा मानकों को जमीनी स्तर पर लागू करना।
- NEP 2020 की बची हुई योजनाओं को लागू करना: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के तहत नए पाठ्यक्रम ढाँचे (NCF), बोर्ड परीक्षाओं के नए पैटर्न और उच्च शिक्षा में बहु-विषयक सुधारों को गति देना।
- NEET परीक्षा प्रणाली में संभावित बदलाव: वर्ष 2027 से नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) फॉर्मेट में ले जाने की योजना और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शी ढांचा तैयार करना।
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