Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का 7वां दिन, 5 किलो वजन घटा; धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग तेज

नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026: लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद् और पद्म श्री पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रोटेस्ट स्थल पर चल रहे इस आंदोलन और वांगचुक के अनशन का आज 7वां दिन है। देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है, जिसने केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का 7वां दिन, 5 किलो वजन घटा, हालत नाजुक!

हर गुजरते घंटे के साथ बिगड़ रही है सेहत

सोनम वांगचुक देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के लिए अपनी जान दांव पर लगाए हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जारी ताजा स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार, वांगचुक ने अब तक 5 किलो वजन गंवा दिया है और उनका वजन घटकर 61.7 किलो रह गया है। दीपके ने बताया कि वांगचुक काफी कमजोर और थके हुए दिख रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें ब्लड प्रेशर और शुगर कम होने के कारण अधिक पानी और नमक लेने की सलाह दी है, क्योंकि लंबे अनशन के कारण अब उनके अंगों और मांसपेशियों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष: 20 छात्रों की मौत का जिम्मेदार कौन?

इस आंदोलन के जरिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को घेरा जा रहा है। अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि आखिर 20 से अधिक छात्रों की मौत और NEET-UG 2026 पेपर लीक घोटाले के बाद भी शिक्षा मंत्री को पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सोनम वांगचुक की सेहत को कुछ भी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन NEET, CBSE और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और कोचिंग के दबाव में आकर जान गंवाने वाले छात्रों को न्याय दिलाने के लिए किया जा रहा है। वांगचुक का कहना है कि वे हिमालय संरक्षण और शिक्षा सुधार दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर यह लड़ाई लड़ रहे हैं।

दिग्गजों का मिला साथ, लेकिन सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन को विपक्ष और नागरिक समाज का भारी समर्थन मिल रहा है। अभिनेता प्रकाश राज, योगेंद्र यादव, वामपंथी नेता ब्रिंदा करात, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष समेत कई बड़े राजनेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन स्थल पर पहुंच चुके हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में UPSC एस्पिरेंट्स और छात्र भी इस आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं।

दूसरी तरफ, इस आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर दो फाड़ देखने को मिल रहा है। आलोचक और बीजेपी समर्थक इसे एक राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रदर्शन में असली NEET छात्र कम हैं, बल्कि विपक्षी ताकतें ज्यादा सक्रिय होकर अपना एजेंडा चमका रही हैं। कुछ यूजर्स ने आंदोलन के आयोजक अभिजीत दीपके पर भी निशाना साधा है कि वे खुद अनशन पर बैठने के बजाय सोनम वांगचुक को आगे कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक का यह अनशन देश की परीक्षा प्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर चुका है। CJP ने अब इस आंदोलन को और तेज करने के लिए देशभर में एक दिवसीय 'सॉलिडारिटी फास्ट' (एकीकरण उपवास) का आह्वान किया है। विपक्ष जहां इसे मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बता रहा है, वहीं सरकार के लिए चुनौती यह है कि वे इस संकट का समाधान कैसे निकालते हैं। फिलहाल जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर सरकार ने जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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