भोपाल में 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक का सफल समापन, ऐतिहासिक 'भोपाल घोषणापत्र' हुआ स्वीकार

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक का ऐतिहासिक सफलता के साथ समापन हो गया है। इस उच्च स्तरीय बैठक के अंत में सभी सहभागी देशों ने सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणापत्र' को अपनाया। यह घोषणापत्र ब्रिक्स के सदस्य देशों और साझेदार देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, कलात्मक नवाचारों और पारंपरिक धरोहरों के संरक्षण को मजबूत करने के लिए एक अत्यंत व्यावहारिक और दूरदर्शी खाका पेश करता है। इस वैश्विक बैठक ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सांस्कृतिक ताने-बाने को नया आयाम देने का काम किया है।

11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक भोपाल में संपन्न: भोपाल घोषणापत्र से सांस्कृतिक सहयोग को मिली नई दिशा
Image Source: PIB


तीन कार्य समूह बैठकों के बाद मिला सफलता का मुकाम

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक ने एक सुनियोजित प्रक्रिया के जरिए प्रगति की है। इस महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुँचने के लिए तीन संस्कृति कार्य समूह बैठकों का आयोजन किया गया था। पहली बैठक अप्रैल 2026 के अंत में वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी, जिसके बाद जून 2026 की शुरुआत में पवित्र नगरी वाराणसी में दूसरी बैठक संपन्न हुई। तीसरी बैठक अगस्त 2026 की शुरुआत में भोपाल में आयोजित की गई, जिसके तुरंत बाद यह भव्य मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक चर्चाएं की गईं।

14 देशों के 55 प्रतिनिधियों की ऐतिहासिक भागीदारी

भोपाल में आयोजित इस मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत सहित कुल 14 देशों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश और 4 भागीदार देश शामिल थे। ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य देशों में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात ने हिस्सा लिया, जिसमें मिस्र के प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड जैसे भागीदार देशों की मौजूदगी ने इस आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया। इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों की व्यक्तिगत उपस्थिति ने संस्कृति ट्रैक में उच्च स्तरीय वैश्विक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। पूरी बैठकों के दौरान दुनिया भर से आए 55 प्रतिनिधियों ने आपसी विचारों का आदान-प्रदान किया।

'भोपाल घोषणापत्र' की मुख्य बातें और एआई पर फोकस

इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" रहा है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए भोपाल घोषणापत्र में सांस्कृतिक व रचनात्मक उद्योगों और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। घोषणापत्र के तहत रचनाकारों को नए डिजिटल टूल्स के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंच प्रदान करने, कलात्मक प्रथाओं के आदान-प्रदान और वित्तीय सहयोग पर सहमति बनी है। इसके अलावा सांस्कृतिक संपदा की उनकी मूल भूमि पर सफल वापसी, यूनेस्को बहुराष्ट्रीय नामांकनों में सहयोग और प्राचीन धरोहरों की खोज के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई सक्षम टूल्स के उपयोग पर गहन चर्चा हुई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि एआई प्रणालियों में कॉपीराइट कार्यों के इस्तेमाल को लेकर कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा, पारदर्शिता और उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के सिद्धांत को इसमें प्राथमिकता दी गई है।

भारत का बड़ा कदम: स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री की घोषणा

सांस्कृतिक क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और ठोस पहल करते हुए भारत ने स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री (Voluntary Artist Registry) विकसित करने की प्रायोगिक योजना की घोषणा की है। भारत की इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के कलाकारों, साहित्यकारों और रचनात्मक पेशेवरों के बीच सीधे संपर्क को सुगम बनाना है। इससे एक मजबूत वैश्विक पेशेवर नेटवर्क तैयार होगा और कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने हुनर को प्रदर्शित करने के नए व बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

रंगारंग ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव और वसुधैव कुटुंबकम का संदेश

सम्मेलन के एक प्रमुख आकर्षण के रूप में भोपाल में दो दिवसीय ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक उत्सव में बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के कला दलों ने अपनी समृद्ध और विविध पारंपरिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय आदर्श वाक्य "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के मूल भाव पर आधारित इस महोत्सव ने जन-संपर्क और वैश्विक कलात्मक संवाद का एक जीवंत मंच तैयार किया। महोत्सव के अंतिम चरण में ब्रिक्स देशों की विभिन्न भाषाओं में दी गई सामूहिक संगीतमय प्रस्तुति ने विविधता में एकता की एक बेहद खूबसूरत मिसाल पेश की।

भारत की समृद्ध प्राचीन विरासत का अनुभव और द्विपक्षीय वार्ताएं

मंत्रिस्तरीय बैठकों के साथ-साथ यह आयोजन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का भी एक बेहतरीन जरिया बना। भारतीय संस्कृति मंत्री और सचिव स्तर पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं हुईं, जिससे आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। इसके अलावा आए हुए विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को भारत की प्रागैतिहासिक और ऐतिहासिक विरासत का सजीव अनुभव कराने के विशेष इंतजाम किए गए। प्रतिनिधियों ने भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS) का भ्रमण किया। इसके पश्चात उन्हें विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप ले जाया गया ताकि वे भारत की बौद्ध विरासत से रूबरू हो सकें। कार्यक्रम के समापन चरण में प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका की प्रागैतिहासिक शैल गुफाओं की यात्रा तय की गई, जहाँ उन्होंने भारत की प्राचीनतम मानव सभ्यता और गुफा कला का अवलोकन किया।

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी सदस्य और साझेदार देशों द्वारा दिखाए गए रचनात्मक सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया है और भविष्य में एक अधिक जुड़े हुए, समावेशी व समृद्ध सांस्कृतिक ढांचे के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

A K

Founding Editor

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने