जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर कुदरत का भीषण कहर देखने को मिला है। किश्तवाड़ जिले के छात्रू इलाके में शनिवार तड़के करीब ढाई बजे अचानक बादल फटने (Cloudburst) की घटना से भारी तबाही मच गई। बादल फटने के तुरंत बाद पहाड़ी नालों में आए उफान और मलबे के तेज बहाव ने देखते ही देखते पूरे इलाके को जलमग्न कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा से बड़े पैमाने पर ढांचागत नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक इस घटना में किसी भी इंसान के हताहत होने की खबर नहीं है।
दुकानों और घरों में घुसा पानी, बह गए वाहन
शनिवार की सुबह जैसे ही छात्रू के निवासियों की आंख खुली, तो चारों तरफ पानी, कीचड़, पत्थर और भारी मलबा पसरा हुआ था। बादल फटने के बाद आए तेज सैलाब में स्थानीय नाले के किनारे पार्क किए गए दो वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए। छात्रू का मुख्य बाजार पूरी तरह से पत्थरों और कीचड़ से पट गया। कई व्यावसायिक दुकानों, शोरूम और आवासीय घरों में पानी और मलबा घुसने से लाखों रुपये के सामान का भारी नुकसान हो गया है। बाढ़ के पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।राष्ट्रीय राजमार्ग ठप, यातायात बुरी तरह प्रभावित
इस भीषण घटना के चलते क्षेत्र की यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह से ठप हो गई है। किश्तवाड़-छात्रू-सिंथन राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह मलबा आने से वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। यह मार्ग कश्मीर घाटी को जोड़ने वाले बेहद प्रमुख रास्तों में से एक है, जिसकी वजह से यातायात बाधित होने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन की टीमें हाईवे से मलबा हटाने और रास्ता साफ करने में मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।सुरक्षा के मद्देनजर चेनाब घाटी में स्कूल बंद
क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। चेनाब घाटी के तीनों प्रमुख जिलों किश्तवाड़, डोडा और रामबन में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सुरक्षा के लिहाज से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑनलाइन मोड में कक्षाएं संचालित करने का आदेश जारी किया है। पहाड़ियों से पत्थर गिरने (Shooting Stones) और रास्तों पर फिसलन के चलते स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा न करने की सख्त सलाह दी गई है।राहत और बचाव कार्य जारी, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
आपदा की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) छात्रू, पुलिस बल और नागरिक प्रशासन के आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राहत टीमों को प्रभावित इलाकों में तुरंत तैनात कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए किश्तवाड़ के उपायुक्त (DC) से बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित दुकानदारों और व्यावसायिक संपत्तियों के नुकसान का तुरंत आकलन किया जाएगा और सरकारी नियमों के तहत उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।मौसम विभाग का रेड अलर्ट, नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत
मौसम विभाग (MeT) ने पूरे जम्मू संभाग के लिए अलर्ट जारी रखा है। कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश की संभावना के कारण भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और जलभराव का खतरा लगातार मंडरा रहा है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के पाहलीपोरा इलाके से भी भारी बारिश के कारण घरों में पानी घुसने की खबरें आई हैं। प्रशासन ने नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी कंट्रोल रूम से संपर्क करने की अपील की है। आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है।
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