PM Modi Meets CWG 2026 Medal Winners: 'जो खेलेगा वो खिलेगा', ग्लासगो में परचम लहराने वाले भारतीय एथलीटों से पीएम मोदी ने की खास मुलाकात

ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Commonwealth Games 2026) में भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाले खिलाड़ियों का स्वदेश लौटने पर भव्य स्वागत हुआ। इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न उस समय और भी खास बन गया जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं और भारतीय दल को अपने सरकारी आवास पर आमंत्रित किया और उनसे सीधी बातचीत की। पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, लगन और मैदान पर दिखाए गए अदम्य साहस की दिल खोलकर तारीफ की।

PM Modi Meets CWG 2026 Medal Winners: पीएम मोदी ने राष्ट्रमंडल खेल विजेताओं से की मुलाकात, दिया 'जो खेलेगा वो खिलेगा' का मंत्र

इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने एक नया वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें वे खिलाड़ियों के साथ मुस्कुराते हुए भारत माता की जय का उद्घोष करते दिखे। इस खास मौके पर पीएम मोदी ने देशवासियों को एक नया मंत्र देते हुए कहा कि जो खेलेगा, वो खिलेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस यादगार पल की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए देश के हर नागरिक से आग्रह किया कि वे भारतीय खेलों और हमारे एथलीटों का हमेशा उत्साहवर्धन करते रहें।

पीएम आवास पर जमा खिलाड़ियों का मेला, मोदी ने बढ़ाया हौसला

लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस अभिनंदन समारोह में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगा फहराने वाले मुक्केबाज, भारोत्तोलक, ट्रैक एंड फील्ड एथलीट, जूडो खिलाड़ी और पैरा एथलीट शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक खिलाड़ी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनके खेल के अनुभवों तथा ग्लासगो में आई चुनौतियों के बारे में जाना।

मुलाकात के बाद स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना हर खिलाड़ी के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान और गर्व का क्षण होता है। साक्षी ने बताया कि पीएम मोदी स्वभाव से बहुत ही विनम्र हैं और वे हर खिलाड़ी का मनोबल ऐसे बढ़ाते हैं जैसे परिवार का कोई बड़ा बुजुर्ग मार्गदर्शन कर रहा हो। खिलाड़ियों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह स्नेह और समर्थन उन्हें भविष्य में ओलिंपिक और अन्य वैश्विक मंचों पर और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।

'जो खेलेगा वो खिलेगा' - खेल संस्कृति को मजबूत करने का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा से ही भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इस मुलाकात के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा कि जो खेलेगा, वो खिलेगा, हमेशा भारत के लिए चीयर करें।

पीएम मोदी का मानना है कि खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं बल्कि जीवन में अनुशासन, टीम भावना और विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने का जज्बा भी सिखाते हैं। इस अवसर पर उन्होंने देश के युवाओं को खेलों से अधिक से अधिक जुड़ने का आह्वान किया। सरकार की नीतियां जैसे 'खेलो इंडिया' और 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम राष्ट्रमंडल खेलों के 39 पदकों के रूप में सामने आया है।

मुक्केबाजों और जूडो खिलाड़ियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन

ग्लासगो खेलों में भारत का अभियान अभूतपूर्व रहा। भारत ने कुल 39 पदक अपने नाम किए, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने प्रतियोगिता में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक हासिल किए, जिसमें 7 स्वर्ण पदक शामिल थे। महिला मुक्केबाजों का दबदबा ऐसा रहा कि उन्होंने अकेले 5 स्वर्ण पदक देश की झोली में डाले। प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी ने रिंग में अपने विरोधियों को मात देकर देश का नाम रोशन किया।

इसके अलावा जूडो में भी भारत ने नया इतिहास रचा। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर एक ही राष्ट्रमंडल खेल संस्करण में दो जूडो स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। भारोत्तोलन में भी भारत का परचम लहराया, जहां मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की।

पैरा एथलीटों और ट्रैक एंड फील्ड सितारों ने रचा इतिहास

ग्लासगो खेलों की एक और बड़ी उपलब्धि भारत के पैरा एथलीटों और ट्रैक एंड फील्ड के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन रहा। गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में एक नया इतिहास रचा। उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर एक ही राष्ट्रमंडल खेल संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बनने का गौरव हासिल किया।

वही पैरा एथलीटों ने कुल 7 पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा किया। शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं के एफ57 शॉट पुट इवेंट में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, जो राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक था। इसके साथ ही दिलीप महादु गावित और सोमन राणा ने भी अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया।

भारतीय खेल के स्वर्णिम युग की शुरुआत

इस बार राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन कई मायनों में कठिन था क्योंकि निशानेबाजी, कुश्ती, हॉकी और बैडमिंटन जैसे भारत के पारंपरिक पदक दिलाने वाले खेलों को इस संस्करण में शामिल नहीं किया गया था। इसके बावजूद भारतीय दल ने अन्य खेलों में अपनी नई ताकत दिखाई और चौथे स्थान पर कब्जा जमाया।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस मुलाकात ने खिलाड़ियों के भीतर एक नया ऊर्जा और उत्साह भर दिया है। यह मुलाकात न केवल बीते हुए पदकों का जश्न थी, बल्कि भविष्य के खेलों में भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का संकल्प भी थी।

A K

Founding Editor

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने