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| NITI Aayog Governing Council Meeting |
हिमाचल के लिए उच्च स्तरीय समिति की मांग और वित्तीय संकट
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य वर्तमान में कई अभूतपूर्व वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। यह समिति राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) की समाप्ति, हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदाओं से हुए बुनियादी ढांचे के नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में आई कमी और वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू होने से राज्य को हो रही निरंतर राजस्व हानि का समग्र और वैज्ञानिक मूल्यांकन कर सके।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिमाचल प्रदेश देश की समग्र प्रगति और पर्यावरण संरक्षण में बहुत बड़ा और बहुमूल्य योगदान दे रहा है। इसके बावजूद, केंद्र की वर्तमान आर्थिक नीतियों और कुछ व्यवस्थागत बदलावों के कारण राज्य को भारी वित्तीय तंगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने न्यायोचित अधिकारों की वकालत करते हुए अनुरोध किया कि प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश को उसका उचित वित्तीय हिस्सा तुरंत जारी करे।
मुख्यमंत्री ने कहा,
हिमाचल प्रदेश देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ है। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक शोध के अनुसार, हिमाचल अपने घने जंगलों और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से देश को हर साल लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं (Ecological Services) मुफ्त प्रदान करता है, लेकिन इसके बदले राज्य को कोई विशेष प्रतिपूर्ति या आर्थिक प्रोत्साहन नहीं मिलता।
राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति और आपदा राहत की मांग
बैठक के दौरान सीएम सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस अनुदान के बंद होने से पहाड़ी राज्यों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश की वित्तीय रीढ़ प्रभावित हुई है। हालांकि, पहाड़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की निरंतर मांग पर केंद्र द्वारा 25,000 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है, लेकिन भौगोलिक जटिलताओं और हाल के नुकसानों को देखते हुए यह राशि बेहद नाकाफी है। मुख्यमंत्री ने हिमाचल में जारी विभिन्न विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार से इस राहत कोष को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने की अपील की।जीएसटी नुकसान, बिजली रॉयल्टी और लंबित बकाया का लेखा-जोखा
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के साथ हिमाचल प्रदेश के साथ हो रहे आर्थिक असंतुलन को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद पिछले आठ वर्षों में राज्य को करीब 25,000 करोड़ रुपये के बड़े राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, राज्य में लगभग 13,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन क्षमता होने के बावजूद हिमाचल को उसके मुफ्त बिजली के वैध हिस्से से वंचित किया जा रहा है।उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की ओर इशारा करते हुए कहा कि लंबे समय से राज्य का लगभग 7,000 करोड़ रुपये का बकाया लंबित है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए। साथ ही, पिछली प्राकृतिक आपदाओं के बाद केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि भी अभी तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है।
वित्तीय दावों और बकाया राशि का संक्षिप्त विवरण:
- पारिस्थितिकीय सेवाएं (देश को वार्षिक योगदान): ₹90,000 करोड़ (प्रतिवर्ष)
- पिछले 8 वर्षों में जीएसटी से हुआ राजस्व नुकसान: ₹25,000 करोड़
- भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से लंबित बकाया: ₹7,000 करोड़
- केंद्र सरकार से मांगी गई कुल संशोधित सहायता राशि: ₹50,000 करोड़
- केंद्र द्वारा घोषित विशेष आपदा सहायता (लंबित): ₹1,500 करोड़
मानव विकास सूचकांक और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति
बैठक के मुख्य एजेंडे 'समावेशी मानव विकास' पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ राज्य की सामाजिक उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो चुका है। इसके अलावा, स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में उल्लेखनीय सुधार करते हुए राज्य ने देश में छठा स्थान हासिल किया है।गौरतलब है कि वर्ष 2022 में जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब राज्य इस सूचकांक में 21वें स्थान पर पिछड़ रहा था। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी हिमाचल का सकल नामांकन अनुपात (GER) 43 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो कि 28.4 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों में भी राज्य का प्रदर्शन देश के शीर्ष राज्यों में रहा है।
हरित ऊर्जा, हवाई संपर्क और सामाजिक सुरक्षा के प्रयास
हिमाचल को देश का अग्रणी 'ग्रीन राज्य' बनाने के संकल्प को दोहराते हुए सीएम ने कहा कि सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज और उन्नत बैटरी स्टोरेज जैसी दूरदर्शी पहलों पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने केंद्र से चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान हिमाचल के स्थानीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उन्होंने ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का जिक्र किया, जिसके तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख निर्धनतम परिवारों की पहचान कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उन्होंने हिमाचल को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने और कांगड़ा के गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए केंद्रीय सहयोग की मांग की।
प्रशासनिक सुधार, AI तकनीक और नशामुक्त अभियान
शिशु और महिला पोषण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा, तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध डेटा के एकीकरण को महत्वपूर्ण बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित साक्ष्य-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य में पैर पसार रहे नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे व्यापक नशामुक्त अभियान की जानकारी दी और ड्रग तस्करी को रोकने हेतु केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से बेहतर समन्वय व सहयोग मांगा।इस उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल, वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सदस्य उपस्थित थे। हिमाचल प्रदेश की ओर से मुख्य सचिव के.के. पंत ने भी मुख्यमंत्री के साथ इस बैठक में हिस्सा लिया।
रिपोर्ट: मोहम्मद अतहरुद्दीन मुन्ने भारती (पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और एडवोकेट)
